MGNREGA Water Structures : गंभीर जल संकट से घिरे जिलों में मनरेगा की 65% राशि अब जल संचय संरचनाओं पर होगी खर्च

MGNREGA Water Structures

देश में बढ़ते जल संकट (MGNREGA Water Structures) को देखते हुए केंद्र सरकार ने जल संरक्षण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने शुक्रवार को सुजलाम भारत मुहिम की शुरुआत करते हुए बताया कि वर्ष 2025–26 में पूरे देश में एक करोड़ नई जल संचय संरचनाएँ बनाई जाएंगी। यह निर्माण मनरेगा और जनभागीदारी के माध्यम से किया जाएगा।

सरकार ने मनरेगा नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि डार्क जोन यानी गंभीर जल संकट वाले जिलों में मनरेगा की 65% राशि केवल जल संचय संरचनाओं पर खर्च होगी। वहीं येलो जोन वाले जिलों में 40% और सामान्य जिलों में 30% राशि जल संरक्षण से जुड़े कार्यों के लिए अनिवार्य होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश को आने वाले वर्षों में 1180 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) साफ पानी की जरूरत होगी, जबकि वर्तमान जल संचय क्षमता सिर्फ 750 BCM है। भारत में भले ही 650 से अधिक बड़े बांध हैं, लेकिन नई परिस्थितियों में बड़े डैम बनाना कठिन होता जा रहा है। इसके लिए भारी-भरकम जमीन, 25,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत और लगभग 25 वर्षों का समय लगता है।

इसके अलावा नदियों में पानी का बहाव लगातार घट रहा है, जिससे भविष्य की चुनौतियाँ और बढ़ रही हैं। ऐसे में छोटे और मध्यम स्तर की जल संचय संरचनाएँ—जैसे तालाब, बोल्डर चेक, परकोलेशन टैंक, एनीकट, स्टॉपडैम संकट का स्थायी समाधान बन सकती हैं। पिछले वर्ष इस अभियान के तहत उत्कृष्ट परिणाम मिले थे, जिसे देखते हुए इसका विस्तार किया जा रहा है।

सीआर पाटिल ने कहा कि केवल संरचनाएँ (MGNREGA Water Structures) बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को जल के सही उपयोग, रिसाइक्लिंग, वर्षा जल संचयन और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने के लिए भी जागरूक करना होगा। किसानों को पारंपरिक सिंचाई तरीकों के बजाय ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों का उपयोग तेज़ी से बढ़ाना होगा।

दो दिवसीय सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के जल संरक्षण विभागों के अधिकारियों व विशेषज्ञों ने भाग लिया और जल प्रबंधन के वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपायों पर मंथन किया।