MGNREGA Success Story Chhattisgarh : आजीविका डबरी बनी छोटे किसानों की ताकत, मत्स्य पालन से बदली रैनधर राणा की आर्थिक तस्वीर

MGNREGA Success Story Chhattisgarh

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और छोटे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में आजीविका डबरी योजना एक प्रभावी मॉडल (MGNREGA Success Story Chhattisgarh) के रूप में उभर रही है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत जिले में आजीविका डबरियों के निर्माण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सिंचाई, जल संरक्षण और अतिरिक्त आय के नए रास्ते खुल रहे हैं।

1000 डबरियों का लक्ष्य, करोड़ों का निवेश

जिला प्रशासन ने बीजापुर में करीब 1000 आजीविका डबरियों के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से 431 आजीविका डबरियाँ स्वीकृत की जा चुकी हैं। इन डबरियों से न सिर्फ खेतों को पानी मिल रहा है, बल्कि भू-जल स्तर को भी संबल मिल रहा है।

सिंचाई के साथ आय का नया साधन

आजीविका डबरियों के जरिए किसान अब केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं हैं। सिंचाई सुविधा के साथ-साथ बागवानी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से ग्रामीण परिवारों की आमदनी में उल्लेखनीय (MGNREGA Success Story Chhattisgarh) वृद्धि हो रही है। यही वजह है कि यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए संजीवनी साबित हो रही है।

मेहनत से लिखी सफलता की कहानी

बीजापुर जिले की ग्राम पंचायत गंगालूर के किसान रैनधर राणा ने आजीविका डबरी का बेहतर उपयोग कर एक मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी डबरी में मत्स्य पालन शुरू किया, जिससे उन्हें करीब 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।

इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी 1 एकड़ कृषि भूमि में लगभग 25 मिश्रित फलदार पौधे भी लगाए हैं, जिनमें आम और अमरूद प्रमुख हैं। इससे आने वाले वर्षों में उनकी आय और बढ़ने की उम्मीद है।

तकनीकी सहयोग से बढ़ी उपयोगिता

तकनीकी सहायक तोरण लाल उर्वशा के अनुसार, रैनधर राणा ने वर्ष 2021-22 में 1 लाख 60 हजार रुपये की लागत से आजीविका डबरी का निर्माण (MGNREGA Success Story Chhattisgarh) कराया था। डबरी का आकार 20 मीटर लंबाई, 20 मीटर चौड़ाई और 2.5 मीटर गहराई का है। वर्तमान में आजीविका और मत्स्य पालन को ध्यान में रखते हुए 3 मीटर गहराई की डबरियाँ तैयार की जा रही हैं।

रोजगार भी मिला, गांव को फायदा

रोजगार सहायक प्रताप सेमल ने बताया कि डबरी निर्माण के दौरान करीब 800 मानव-दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ, जिससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर काम मिला।

आत्मनिर्भरता की मजबूत बुनियाद

महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियाँ आज ग्रामीण किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त (MGNREGA Success Story Chhattisgarh) बना रही हैं। जल संरक्षण, सतत कृषि और अतिरिक्त आय के साथ यह योजना छोटे किसानों के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रही है।

यह पहल साबित कर रही है कि सही योजना, मेहनत और तकनीकी सहयोग से ग्रामीण भारत में भी खुशहाली की मजबूत नींव रखी जा सकती है।