MGNREGA Save Movement Congress Protest : कांग्रेस ने वीबी-जीरामजी कानून के खिलाफ 45 दिन का देशव्यापी आंदोलन शुरू किया
MGNREGA Save Movement Congress Protest
कांग्रेस ने देशभर में मनरेगा को बचाने और नए वीबी-जीरामजी कानून को वापस लेने के लिए अभियान शुरू किया (MGNREGA Save Movement Congress Protest)। इसके पहले चरण में 10 जनवरी से 25 फरवरी तक 45 दिनों तक ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर धरना-प्रदर्शन, घेराव और रैलियों के माध्यम से आंदोलन को गति दी जाएगी। इस दौरान कांग्रेस विपक्षी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी नए कानून के खिलाफ एकजुट करने का प्रयास करेगी।
कांग्रेस कार्यसमिति की 27 दिसंबर की बैठक में यह तय हुआ कि वीबी-जीरामजी कानून की वापसी के लिए व्यापक आंदोलन किया जाएगा। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने प्रेस कांफ्रेंस में इसकी रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि 10 जनवरी को जिला स्तर पर प्रेस कांफ्रेंस, 11 जनवरी को महात्मा गांधी और बाबा साहब अंबेडकर की मूर्तियों के पास उपवास रखा जाएगा। 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल और जनसंपर्क कार्यक्रम होंगे।
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा मजदूरों को व्यक्तिगत पत्र देंगे। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से कांग्रेस का उद्देश्य आंदोलन को ग्रामीण भारत के हर गाँव तक पहुँचाना है (MGNREGA Save Movement Congress Protest)।
30 जनवरी को शहीद दिवस पर वार्ड और ब्लाक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे। 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तर पर मनरेगा धरना और 7 से 15 फरवरी तक विधानसभाओं, राजभवन या केंद्र सरकार के दफ्तरों के सामने राज्य स्तर पर घेराव किए जाएंगे। 16 से 25 फरवरी तक उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में चार बड़ी रैलियों के साथ पहले चरण का संग्राम समाप्त होगा। इस दौरान कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी शामिल होगा और पूरे अभियान का संदेश हर नागरिक तक पहुंचाया जाएगा (MGNREGA Save Movement Congress Protest)।
जयराम रमेश ने बताया कि वीबी-जीरामजी एक्ट संविधान के अनुच्छेद 258 का उल्लंघन करता है। नए कानून में फंड आवंटन अनुपात को 90:10 से बदलकर 60:40 कर दिया गया है, जबकि राज्यों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया। इससे राज्यों की वित्तीय क्षमता पर दबाव पड़ेगा और रोजगार योजना प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि इस अनुच्छेद के उल्लंघन के खिलाफ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती देगी।
केसी वेणुगोपाल ने इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताया और कहा कि यह रोजगार के अधिकार को खतरे में डालने वाला केंद्रीकरण है। उन्होंने बताया कि संसद में समूचे विपक्ष ने नए कानून का विरोध किया है और तेलंगाना विधानसभा ने मनरेगा की बहाली का प्रस्ताव पारित किया है। कांग्रेस का लक्ष्य काम के अधिकार और पंचायत संस्थाओं की सुरक्षा करना है और ग्रामीण गरीब, महिला श्रमिक, दलित और आदिवासी समुदाय के साथ खड़ा रहना है। इस आंदोलन के जरिए देशभर में लोकतांत्रिक अधिकारों और रोजगार सुरक्षा का संदेश फैलाया जाएगा।
संग्राम का पहला चरण
कांग्रेस ने 10 जनवरी से 25 फरवरी तक देशभर में पहला चरण शुरू किया (MGNREGA Save Movement Congress Protest)। इस दौरान जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रेस कांफ्रेंस, पंचायत चौपाल और जनसंपर्क कार्यक्रम होंगे। शहीद दिवस पर शांतिपूर्ण धरना, जिला स्तर पर मनरेगा धरना और विधानसभाओं तथा केंद्र सरकार के दफ्तरों के सामने राज्य स्तर पर घेराव आयोजित किया जाएगा। अंत में पूरे देश में चार बड़ी रैलियों के साथ पहले चरण का समापन होगा।
कांग्रेस का संदेश और उद्देश्य
कांग्रेस का लक्ष्य है रोजगार अधिकार और पंचायती राज संस्थाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना। पार्टी का कहना है कि नया वीबी-जीरामजी कानून संघीय ढांचे के खिलाफ है और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। महिला, दलित, आदिवासी और ग्रामीण गरीबों के हित में यह आंदोलन खड़ा किया गया है। पूरे अभियान में (MGNREGA Save Movement Congress Protest) का संदेश ग्रामीण भारत तक पहुंचेगा।
