NEET PG Counselling Update : चिकित्सा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की काउंसलिंग स्थगित

NEET PG Counselling Update

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आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी कर प्रवेश वर्ष 2025 छत्तीसगढ़ राज्य के चिकित्सा स्नातकोत्तर एमडी व एमएस पाठ्यक्रम की प्रथम चरण की काउंसिलिंग के लिए आनलाइन आवेदन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। यह निर्णय (Medical PG Admission Chhattisgarh) से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ा अपडेट माना जा रहा है।

पूर्व में आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा द्वारा 18 नवंबर 2025 के आदेश के जरिए छत्तीसगढ़ राज्य कोटे की चिकित्सा स्नातकोत्तर सीटों पर प्रवेश के लिए राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित NEET PG 2025 में पात्र घोषित अभ्यर्थियों से आनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे। लेकिन नए आदेश में लिखा है कि प्रथम चरण की काउंसिलिंग के लिए आनलाइन आवेदन प्रक्रिया को अपरिहार्य कारणों से स्थगित किया जाता है। इस संबंध में आगे की जानकारी विभाग की वेबसाइट के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी।

बता दें कि डॉ. समृद्धि दुबे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चिकित्सा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ में लागू Domicile Reservation को चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिविजन बेंच ने डोमिसाइल आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा ने काउंसलिंग प्रक्रिया को रोक दिया है।

डॉ. समृद्धि ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की केविएट

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के निर्णय के बाद डॉ. समृद्धि दुबे ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर कर दी है। दायर केविएट में कहा गया है कि यदि राज्य शासन हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देता है, तो सुनवाई के दौरान एकतरफा निर्णय न लेते हुए उनका पक्ष भी सुना जाए।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या लिखा

याचिका की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने अपने विस्तृत फैसले में लिखा है कि पीजी मेडिकल कोर्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों के महत्व को देखते हुए “निवास” के आधार पर उच्च स्तरीय आरक्षण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा। यदि इस तरह के आरक्षण को अनुमति दी जाती है, तो यह कई छात्रों के मौलिक अधिकारों का हनन होगा, क्योंकि केवल एक अलग राज्य का निवासी होने के आधार पर उनके साथ असमान व्यवहार किया जाएगा। यह संविधान के समानता सिद्धांत और कानून के समक्ष समान अधिकार से इनकार करने के समान है।