Medical Negligence Case : इलाज में गंभीर चूक पड़ी भारी, महिला की मौत के मामले में डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधक जेल भेजे गए

Medical Negligence Case

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इलाज के नाम पर की गई लापरवाही एक परिवार की जिंदगी उजाड़ सकती है – इस मामले ने यही सख्त संदेश दिया है। महीनों तक चली जांच के बाद अब पुलिस कार्रवाई ने मामले को निर्णायक मोड़ पर ला दिया है।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला के धमधा थाना क्षेत्र में महिला मरीज की मौत से जुड़े मामले में पुलिस ने श्रेया अस्पताल के डॉक्टर और प्रबंधक को गिरफ्तार (Medical Negligence Case) कर लिया है। दोनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और 3(5) के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

मामला ग्राम भरनी निवासी पद्माबाई वर्मा की मौत से जुड़ा है। मृतिका के पुत्र चिरज वर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 10 अक्टूबर 2025 की रात उनकी मां घर के आंगन में गिर गई थीं, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई। अगले दिन उन्हें इलाज के लिए श्रेया अस्पताल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर में भर्ती कराया गया।

परिजनों के अनुसार 13 अक्टूबर को पद्माबाई का ऑपरेशन किया गया। इसके बाद 14 अक्टूबर को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और सांस लेने में परेशानी (Medical Negligence Case) होने लगी। इस स्थिति में अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें हायर सेंटर रेफर किया, लेकिन आरोप है कि यह रेफरल परिजनों की सहमति के बिना किया गया।

मृतिका को एम्बुलेंस के माध्यम से शंकराचार्य अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि रेफरल के दौरान एम्बुलेंस में न तो डॉक्टर मौजूद था और न ही आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी की व्यवस्था की गई थी, जिससे रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

पुलिस जांच में यह सामने आया कि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर द्वारा उपचार के दौरान गंभीर उपेक्षा और लापरवाही बरती गई। विवेचना के बाद आरोपी मनीष राजपूत (अस्पताल प्रबंधक) और डॉ. अभिषेक पांडेय के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया।

साक्ष्य पर्याप्त पाए जाने पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश (Medical Negligence Case) किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना नियमानुसार की गई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। यह मामला चिकित्सा लापरवाही को लेकर एक अहम उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसमें कानून ने सख्त रुख अपनाया है।