Mahatma Gandhi NREGA Plantation : मनरेगा से बंजर जमीन बनी हरियाली की मिसाल
Mahatma Gandhi NREGA Plantation
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत चल रहे कार्य अब केवल मजदूरी तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बनते जा रहे हैं।
रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बिजना में मनरेगा के माध्यम से किए गए वृक्षारोपण कार्य ने यह साबित कर दिया है कि सही योजना और स्थानीय सहभागिता से बंजर भूमि भी हरियाली और आजीविका का स्थायी साधन बन सकती है।
ग्राम पंचायत बिजना में स्वीकृत यह वृक्षारोपण परियोजना मनरेगा योजना (Mahatma Gandhi NREGA Plantation) के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने का सशक्त उदाहरण है। इस कार्य का उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना, पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना और भविष्य के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करना था।
परियोजना का क्रियान्वयन स्व-सहायता समूह से जुड़ी हितग्राही कस्तूरी छडानन द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे समर्पण के साथ इस जिम्मेदारी को निभाया।
इस परियोजना पर कुल 1.70 लाख रुपए की लागत आई, जिसमें 1.18 लाख रुपए मजदूरी मद और 0.52 लाख रुपए सामग्री मद के अंतर्गत व्यय किए गए। कार्य की शुरुआत 31 जुलाई 2020 को हुई और 31 अगस्त 2022 को इसे पूर्ण किया गया।
इस अवधि में मनरेगा के तहत वृक्षारोपण कार्य (Mahatma Gandhi NREGA Plantation) से 707 मानव दिवस का सृजन हुआ, जिससे ग्राम के अनेक अकुशल श्रमिकों को निरंतर रोजगार प्राप्त हुआ।
औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद ग्राम पंचायत बिजना में लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी भूमि इस पहल से हरियाली में बदल गई। लगाए गए पौधों का लगातार तीन वर्षों तक रखरखाव किया गया, जिससे पौधों की वृद्धि सुनिश्चित हो सकी।
यह कार्य केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हुआ। आज वही भूमि गांव की पहचान बनती जा रही है, जहां कभी बंजरपन था।
कार्य की स्वीकृति के पश्चात ग्राम पंचायत द्वारा तकनीकी सहायक के मार्गदर्शन में मनरेगा आधारित वृक्षारोपण योजना (Mahatma Gandhi NREGA Plantation) का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया।
हितग्राही कस्तूरी ने बताया कि योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायक से संपर्क किया। जनपद पंचायत तमनार के अधिकारियों के सहयोग से कार्य समयबद्ध और व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
लगभग 200 पौधों के रोपण और उनके संरक्षण की तकनीकी जानकारी मिलने से भविष्य में फल-फूल और अन्य वनोपज आधारित आय के अवसर भी सृजित होने की उम्मीद जगी है।
कस्तूरी का कहना है कि मनरेगा के तहत हरियाली विकास (Mahatma Gandhi NREGA Plantation) ने उन्हें न केवल रोजगार दिया, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया। यह पहल दर्शाती है कि मनरेगा योजना के माध्यम से ग्रामीणों को सम्मानजनक रोजगार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थायी आजीविका की दिशा में भी ठोस बदलाव संभव है।
