Maharashtra Municipal Election : बीएमसी मेयर से पहले मुंबई में सियासी हलचल, डिप्टी सीएम की गैरहाजिरी से सस्पेंस

Maharashtra Municipal Election

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नगर निगम का चुनाव खत्म हो चुका है, लेकिन असली मुकाबला (Maharashtra Municipal Election) अब शुरू हुआ है। सत्ता की गणित में कुछ अंक इधर-उधर होते ही सियासी चालें तेज हो गई हैं। बैठकों की गैरहाज़िरी और अचानक बदली परिस्थितियों ने इस पूरे घटनाक्रम को और रहस्यमय बना दिया है।

यह सियासी हलचल मुंबई में देखने को मिल रही है, जहां देश की सबसे संपन्न मानी जाने वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में अब तक मेयर का चयन (Maharashtra Municipal Election) नहीं हो सका है। मेयर पद के लिए 114 का जादुई आंकड़ा जरूरी है, लेकिन किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होने से जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है।

चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन बहुमत (Maharashtra Municipal Election) से दूर है। दूसरी ओर अलग-अलग दलों की स्थिति ऐसी बन गई है कि बिना गठजोड़ के मेयर चुनना संभव नहीं दिख रहा। इसी बीच सत्ता संतुलन साधने के प्रयासों के बीच ‘होटल पॉलिटिक्स’ की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं।

राजनीतिक हलकों में उस समय और ज्यादा चर्चाएं शुरू हो गईं, जब एक अहम कैबिनेट मीटिंग में दोनों डिप्टी मुख्यमंत्री शामिल (Maharashtra Municipal Election) नहीं हुए। वहीं मुख्यमंत्री एक बार फिर अस्वस्थ बताए गए, जिससे राजनीतिक गतिविधियों को लेकर अटकलें और तेज हो गईं। इसे महज़ संयोग माना जाए या रणनीति, इस पर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, मेयर चुनाव से पहले पार्षदों को एकजुट रखने और संभावित टूट-फूट से बचने के लिए बंद दरवाज़ों के भीतर बैठकों का दौर चल रहा है। अलग-अलग दल अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

बीएमसी में मेयर का चुनाव केवल एक पद का चयन नहीं, बल्कि मुंबई की प्रशासनिक दिशा तय करने वाला फैसला (Maharashtra Municipal Election) माना जाता है। ऐसे में हर कदम फूंक-फूंक कर (Maharashtra Municipal Election) रखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह सस्पेंस सत्ता का रास्ता खोलता है या नई राजनीतिक पटकथा लिखी जाती है।