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Lawyer Petition Supreme Court : पूर्व CJI के ‘बचाव’ में दायर मामलों के बदले 1 करोड़ की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने उस याचिका को खारिज (Lawyer Petition Supreme Court) कर दिया है, जिसमें केंद्र सरकार से एक करोड़ रुपये की फीस और खर्च की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि उसने वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश Dipak Misra के समर्थन में छह मामले दायर किए थे, जिनके लिए उसे भुगतान किया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा – सामाजिक सेवा की कीमत नहीं लगाई जा सकती

मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिका गलत आधार पर दायर की गई है। पीठ में जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul M. Pancholi भी शामिल थे।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी ने संस्थान के हित में काम (Lawyer Petition Supreme Court) किया है तो उसे सामाजिक सेवा माना जाएगा और सामाजिक सेवा को पैसों में नहीं आंका जा सकता।

हाई कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती

यह याचिका लखनऊ के अधिवक्ता अशोक पांडे ने दायर की थी। उन्होंने Allahabad High Court की लखनऊ पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी मांग पहले ही खारिज कर दी गई थी।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के समर्थन में छह अलग-अलग मामले दायर किए थे और इसके लिए लगभग दो लाख रुपये खर्च किए, जो उन्होंने अपनी बेटी से उधार लिए थे।

अदालत ने की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब पहले न्यायाधीशों पर आरोप लगाए (Lawyer Petition Supreme Court) गए थे, तो अब सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है।

अंत में अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता ने संस्थान के लिए कोई कार्य किया है तो वह सामाजिक सेवा के रूप में माना जाएगा और इसके लिए उन्हें सराहना मिल सकती है, लेकिन इसके बदले आर्थिक भुगतान की मांग उचित नहीं है। पीठ ने इसी आधार पर हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

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