Kristalina Georgieva AI Speech : IMF चीफ ने AI को बताया ‘सुनामी’, कहा- 40% नौकरियां होंगी प्रभावित, भारत के लिए बताया बड़ा मौका
Kristalina Georgieva AI Speech
नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए “सुनामी” जैसी ताकत (Kristalina Georgieva AI Speech) बताया। उन्होंने कहा कि AI एक दोधारी तलवार है यह जहां वैश्विक विकास दर को तेज कर सकता है, वहीं श्रम बाजार पर गहरा असर भी डाल सकता है।
AI से बढ़ेगी वैश्विक GDP
IMF प्रमुख के मुताबिक, AI वैश्विक जीडीपी ग्रोथ को सालाना 0.8 प्रतिशत अंक तक बढ़ा सकता है। इससे कोविड-पूर्व स्तर से भी तेज आर्थिक विस्तार संभव है। उन्होंने इसे “शानदार अवसर” बताते हुए कहा कि उत्पादकता में वृद्धि से नए सेक्टर और नई नौकरियों का सृजन हो सकता है।
भारत को लेकर उन्होंने विशेष भरोसा (Kristalina Georgieva AI Speech) जताया। उनका कहना था कि मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा आबादी और स्टार्टअप इकोसिस्टम के चलते भारत AI का लाभ उठाकर 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में तेज कदम बढ़ा सकता है।
लेकिन 40% नौकरियों पर खतरे की चेतावनी
उत्साह के साथ IMF ने गंभीर चेतावनी भी दी। संस्था के रिसर्च के अनुसार, AI वैश्विक स्तर पर लगभग 40% नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह प्रभाव 60% तक और उभरते बाजारों में करीब 40% तक हो सकता है। जॉर्जीवा ने इसे “लेबर मार्केट पर त्सुनामी” करार देते हुए कहा कि एंट्री-लेवल जॉब्स सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
उनके अनुसार, कुछ नौकरियां पूरी तरह खत्म होंगी, कुछ का स्वरूप बदलेगा और कुछ अधिक कुशल एवं उच्च वेतन वाली बनेंगी। यदि सही नीतियां और कौशल विकास कार्यक्रम लागू नहीं किए गए, तो असमानता बढ़ने का खतरा भी है।
नंदन नीलेकणि का दृष्टिकोण
इसी कार्यक्रम के दौरान नंदन नीलेकणि ने कहा कि AI क्रांति केवल कोडिंग तक सीमित (Kristalina Georgieva AI Speech) नहीं रहेगी। भविष्य में असली भूमिका AI सिस्टम को डिजाइन, ऑर्केस्ट्रेट और बिजनेस में प्रभावी तरीके से लागू करने की होगी।
उन्होंने अनुमान जताया कि AI वैश्विक स्तर पर करीब 170 मिलियन नई हाई-स्किल नौकरियां पैदा कर सकता है, जैसे AI इंजीनियर, डेटा फॉरेंसिक विशेषज्ञ, AI लीड और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी ऑपरेटर। हालांकि, बेसिक कोडिंग और पारंपरिक QA जैसी भूमिकाएं धीरे-धीरे कम होती जा सकती हैं।
क्या है आगे की राह?
विशेषज्ञों का मानना है कि AI से उत्पन्न बदलावों को संभालने के लिए स्किल डेवलपमेंट, री-स्किलिंग, शिक्षा सुधार और मजबूत नीति ढांचे की जरूरत होगी। भारत जैसे युवा देश के लिए यह चुनौती के साथ-साथ एक ऐतिहासिक अवसर भी है जहां सही रणनीति अपनाकर AI को विकास का इंजन बनाया जा सकता है।
