Kharif Season : खरीफ सीजन में खेती से पहले क्यों बढ़ी हलचल, किसानों को समय रहते दी गई यह अहम सलाह

भोपाल और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों खेतों की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ (Kharif Season) ली है। किसान बारिश की चाल पर नजर रखते हुए बुआई की योजना बना रहे हैं। इसी बीच खेती को लेकर नई सलाह सामने आने के बाद गांवों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। कई किसान अब फसल चयन से लेकर बीज और खाद तक हर कदम सोच समझकर उठाने की तैयारी कर रहे हैं।

खेतों में जुटे किसानों के बीच यही सवाल सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा है कि इस बार कम जोखिम के साथ बेहतर पैदावार कैसे हासिल की जाए। इसी को देखते हुए कृषि विभाग ने खरीफ सीजन के लिए विस्तृत तकनीकी सलाह जारी की है। इसमें खेती की शुरुआत से लेकर फसल तैयार होने तक जरूरी बातों पर ध्यान देने की अपील की गई है ताकि उत्पादन बढ़े और नुकसान की संभावना कम हो।

क्षेत्र के अनुसार करें फसल का चुनाव Kharif Season

कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि वे अपने इलाके की मिट्टी, मौसम और सिंचाई की उपलब्धता को ध्यान में रखकर ही फसल चुनें। एक ही फसल पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग अलग फसलों की खेती अपनाने की सलाह भी दी गई है। इससे खेती का जोखिम कम होगा और जमीन की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

विभाग ने मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए जैविक खाद के उपयोग पर जोर दिया है। इसके साथ ही अच्छी अंकुरण क्षमता वाले प्रमाणित बीजों का चयन करने और बुआई में बीज की उचित मात्रा रखने की सलाह दी गई है।

मेड़ नाली पद्धति से मिल सकता है बेहतर परिणाम

दलहनी और तिलहनी फसलों की बुआई मेड़ नाली पद्धति या ब्रॉडबेड फरो पद्धति से करने की सलाह दी गई है। इस तरीके से फसल जलभराव और सूखे जैसी परिस्थितियों का बेहतर सामना कर सकती है। इससे पौधों का विकास भी बेहतर होता है और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है।

साथ ही किसानों से कहा गया है कि मौसम की स्थिति के अनुसार ही सिंचाई करें और समय समय पर खेत की नमी की जांच करते रहें ताकि पानी का सही उपयोग (Kharif Season) हो सके।

खाद और उर्वरकों का रखें संतुलन

कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि खाद और उर्वरकों का उपयोग जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में करें। सही मात्रा में पोषक तत्व मिलने से फसल की बढ़वार अच्छी होती है और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

खरपतवार और रोग नियंत्रण में न करें लापरवाही

फसल की बुआई के बाद समय पर निराई गुड़ाई करना जरूरी बताया गया है। यदि जरूरत पड़े तो खरपतवारनाशकों का उपयोग निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार सावधानी से करने की सलाह दी गई है।

कीट और रोगों से बचाव के लिए किसानों को अपनी फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। आवश्यकता होने पर कीटनाशक और फफूंदनाशकों का उपयोग भी विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

फसल विविधीकरण और मौसम पर रखें नजर

विभाग का कहना है कि अलग अलग फसलों की खेती अपनाने से खेती का जोखिम कम (Kharif Season) होता है और मिट्टी की उत्पादक क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। खरीफ सीजन में धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, उड़द और मूंग जैसी प्रमुख फसलों का चयन किसान अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार कर सकते हैं।

इसके अलावा किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखने, उसी के अनुसार खेती के कार्य करने, कृषि वैज्ञानिकों से समय समय पर सलाह लेने और अन्य किसानों के अनुभवों से सीखने की भी सलाह दी गई है। विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ समय पर कृषि कार्य अपनाने से खरीफ सीजन में बेहतर पैदावार प्राप्त की जा सकती है और खेती से जुड़े जोखिम काफी हद तक कम किए जा सकते हैं।

Exit mobile version