
छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और विधायक कवासी लखमा आगामी विधानसभा बजट सत्र में शामिल (Kawasi Lakhma Assembly session) हो सकेंगे। उन्हें उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कुछ निर्धारित शर्तों के साथ सत्र में भाग लेने की अनुमति प्रदान की है। यह सत्र 23 फरवरी से शुरू होकर 20 मार्च तक चलेगा, जिसमें राज्य के वित्तीय और विधायी मुद्दों पर चर्चा होगी।
विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कवासी लखमा की उपस्थिति केवल विधानसभा की कार्यवाही तक सीमित रहेगी। उन्हें सत्र में आने और जाने की पूरी जानकारी विधानसभा सचिवालय को देनी होगी। इसके साथ ही उन्हें अपने निवास क्षेत्र का दौरा करने की अनुमति नहीं होगी और उन्हें निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
निर्धारित शर्तों के अनुसार कवासी लखमा विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं, लेकिन उनके खिलाफ चल रहे मामले से संबंधित किसी भी विषय पर चर्चा करने की अनुमति (Kawasi Lakhma Assembly session) नहीं होगी। साथ ही, उनकी उपस्थिति केवल सत्र के दौरान ही मान्य होगी। यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन किया जाता है, तो उनकी अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने 3 फरवरी 2026 को कवासी लखमा को अंतरिम जमानत प्रदान की थी, जिसके बाद उन्होंने विधानसभा में भाग लेने के लिए आवश्यक अनुमति प्रक्रिया पूरी की। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि न्यायालय के आदेश और नियमों को ध्यान में रखते हुए ही यह निर्णय लिया गया है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें आगामी वित्तीय वर्ष का बजट, विभिन्न विधेयक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा (Kawasi Lakhma Assembly session) होगी। ऐसे में कवासी लखमा की सशर्त वापसी को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायिक प्रक्रिया और विधानसभा के नियमों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए विधायकों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का अवसर दिया जा सकता है।



