Karnataka Leadership Crisis : कर्नाटक में फिर क्यों तेज हुई सत्ता बदलने की चर्चा, दिल्ली बुलाए गए सिद्धारमैया और डीके

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर अंदरूनी हलचल तेज (Karnataka Leadership Crisis) हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को दिल्ली बुलाए जाने के बाद कांग्रेस के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच अब सबसे ज्यादा सवाल इसी बात को लेकर उठ रहे हैं कि आखिर आने वाले दिनों में बड़ा फैसला क्या हो सकता है।

दिल्ली में होने वाली बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में दिनभर चर्चाएं चलती रहीं। कर्नाटक कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन, कैबिनेट फेरबदल और सत्ता संतुलन को लेकर अटकलें लगातार तेज होती जा रही हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी बड़े बदलाव को लेकर आधिकारिक संकेत नहीं दिए गए हैं।

दिल्ली बैठक पर टिकी सबकी नजर : Karnataka Leadership Crisis

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार 26 मई को दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में राज्यसभा और विधान परिषद सीटों के साथ संगठनात्मक समीकरणों पर चर्चा हो सकती है। लेकिन राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता साझेदारी को लेकर हो रही है।

फिर सामने आया सत्ता साझेदारी का मुद्दा

कर्नाटक सरकार के तीन साल पूरे होने के साथ ही पुराना सत्ता साझेदारी फार्मूला फिर चर्चा (Karnataka Leadership Crisis) में आ गया है। डीके शिवकुमार समर्थकों का दावा है कि विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर समझौता हुआ था। हालांकि सिद्धारमैया लगातार यह कहते रहे हैं कि वह पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि वह पार्टी नेतृत्व के हर फैसले का पालन करेंगे।

कैबिनेट फेरबदल की मांग भी तेज

कांग्रेस के भीतर कई विधायक लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की मांग कर रहे हैं। कई नेता मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे हैं और नए चेहरों को मौका देने की बात (Karnataka Leadership Crisis) कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ विधायक इस मुद्दे को लेकर दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात भी कर चुके हैं। वहीं कुछ और नेताओं के भी जल्द राजधानी पहुंचने की चर्चा है।

कांग्रेस नेतृत्व पर बढ़ा दबाव

पार्टी के भीतर यह चिंता भी बढ़ रही है कि लगातार चल रही अटकलों का असर सरकार की कार्यशैली और कांग्रेस की छवि पर पड़ (Karnataka Leadership Crisis) सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस नेतृत्व कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देता है तो इसे सिद्धारमैया के पूरे कार्यकाल के संकेत के तौर पर देखा जाएगा। वहीं इससे डीके शिवकुमार की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है।

खाली पड़े मंत्री पद भी बने वजह

कर्नाटक मंत्रिमंडल में फिलहाल तीन पद खाली पड़े हैं। एक मंत्री के इस्तीफे, दूसरे को हटाए जाने और हाल ही में एक मंत्री के निधन के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार की मांग और तेज हो गई है। इसी वजह से कांग्रेस के भीतर क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को लेकर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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