नई दिल्ली। बकरीद से पहले देश और पड़ोसी मुल्कों की पशु मंडियां पूरी तरह गुलजार हो चुकी हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई लखनऊ कराची और ढाका तक बकरों की खरीदारी के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। लेकिन इस बार कुर्बानी के जानवरों की कीमतें लोगों को चौंका रही हैं। कई खास नस्लों के बकरे लाखों रुपए में बिक रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि महंगाई महंगा चारा बढ़ता ट्रांसपोर्ट खर्च और भीषण गर्मी की वजह से इस बार पशुओं की कीमतों में भारी उछाल आया है।
दिल्ली से मुंबई तक महंगे हुए बकरे
दिल्ली की जामा मस्जिद जाफराबाद और ओखला मंडियों में छोटे बकरों की कीमत 25 हजार रुपए से शुरू होकर 2 लाख रुपए तक पहुंच रही है। वहीं सोजत जमनापारी और तोतापारी नस्ल के बड़े और आकर्षक बकरे 5 लाख रुपए तक बिक रहे हैं।
दिल्ली और उत्तर प्रदेश की मंडियों में कुर्बानी के लिए लाए गए बड़े बैलों की कीमत भी तेजी से बढ़ी है। अच्छे वजन और मजबूत कद काठी वाले बैल 1 लाख से 8 लाख रुपए तक में बिक रहे हैं।
मुंबई की मशहूर देवनार मंडी में राजस्थान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में बकरे और बैल पहुंच रहे हैं। यहां सामान्य बकरे 30 हजार से 80 हजार रुपए तक बिक रहे हैं जबकि प्रीमियम बकरों की कीमत 7 लाख से 10 लाख रुपए तक पहुंच गई है।
गर्मी और महंगाई ने बढ़ाई परेशानी
व्यापारियों के मुताबिक इस बार सबसे बड़ी चुनौती भीषण गर्मी बनी हुई है। तेज गर्म हवाओं और बढ़ते तापमान के कारण कई पशु बीमार पड़ रहे हैं। उन्हें बचाने के लिए लगातार पानी का छिड़काव ग्लूकोज इलेक्ट्रोलाइट्स पंखे और कूलर तक का इंतजाम करना पड़ रहा है।
इस वजह से पशु व्यापारियों की लागत पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है। दोपहर के समय मंडियों में सन्नाटा नजर आता है जबकि ज्यादातर खरीदारी अब शाम और रात के समय हो रही है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी बढ़े दाम
पाकिस्तान के कराची और लाहौर की मंडियों में भी इस बार बकरों और बैलों की कीमतों में बड़ा उछाल देखा जा रहा है। वहां सामान्य बकरे 90 हजार से 1 लाख 25 हजार पाकिस्तानी रुपए तक बिक रहे हैं जबकि प्रीमियम नस्लों के जानवर कई लाख रुपए तक पहुंच चुके हैं।
वहीं बांग्लादेश की ढाका स्थित गबतली मंडी में मशहूर ब्लैक बंगाल नस्ल के बकरे 11 हजार से 17 हजार रुपए तक बिक रहे हैं जबकि भारी बकरे और बैलों की कीमत 40 हजार रुपए से ऊपर पहुंच चुकी है।
कैसे तय होती है जानवरों की कीमत
पशु व्यापारियों के अनुसार बकरों और बैलों की कीमत केवल वजन से तय नहीं होती। उनकी नस्ल लंबाई ऊंचाई रंग सींग चाल शरीर की बनावट और खूबसूरती भी कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है।
सोजत जमनापारी राजनपुरी कामोरी और सिरोही नस्ल के बकरों की सबसे ज्यादा मांग बनी हुई है। बकरीद से ठीक तीन से चार दिन पहले डिमांड और ज्यादा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
