वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू (ITR Filing) हो चुकी है। नौकरीपेशा हों या कारोबार करते हों, रिटर्न भरने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर आयकर विभाग आपकी कुल आय का हिसाब कैसे लगाता है और किस आधार पर टैक्स तय करता है। सही जानकारी होने से न केवल रिटर्न भरना आसान हो जाता है, बल्कि अतिरिक्त टैक्स और भविष्य की परेशानियों से भी बचा जा सकता है।
व्यक्तिगत करदाताओं के लिए आईटीआर 1 और आईटीआर 2 दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है, जबकि आईटीआर 4 भरने वाले करदाताओं के लिए 31 अगस्त 2026 तक का समय दिया गया है।
सबसे पहले तय होती है आपकी टैक्स स्थिति ITR Filing
रिटर्न की जांच के दौरान आयकर विभाग सबसे पहले यह तय करता है कि करदाता भारत का निवासी है या अनिवासी। यदि कोई व्यक्ति भारत का निवासी है तो उसकी वैश्विक आय भी कर गणना में शामिल हो सकती है। वहीं अनिवासी व्यक्ति पर केवल भारत में अर्जित या प्राप्त आय पर ही टैक्स लागू होता है।
इन पांच स्रोतों से जोड़ी जाती है आय
आयकर विभाग कुल आय निकालने के लिए कमाई को पांच प्रमुख हिस्सों में बांटता है। इनमें वेतन से मिलने वाली आय, मकान या संपत्ति से किराया, व्यापार या पेशे से कमाई, शेयर या संपत्ति बेचने से होने वाला पूंजीगत लाभ और ब्याज, डिविडेंड या एफडी जैसी अन्य आय शामिल होती है।
कटौतियों के बाद तय होती है कर योग्य आय
सभी स्रोतों की आय जोड़ने के बाद विभाग जरूरत पड़ने पर क्लबिंग ऑफ इनकम, पुराने नुकसान का समायोजन और कैरी फॉरवर्ड जैसी प्रक्रियाएं अपनाता है। इसके बाद धारा 80C, 80D सहित अन्य पात्र कटौतियां घटाई जाती हैं। इन सभी चरणों के बाद कर योग्य कुल आय तय होती है।
ऐसे निकलता है अंतिम टैक्स
कर योग्य आय तय होने के बाद उसे सामान्य आय और विशेष दर वाली आय में बांटा (ITR Filing) जाता है। सामान्य आय पर चुने गए टैक्स रिजीम और लागू स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है।
इसके बाद पहले से जमा एडवांस टैक्स, टीडीएस, टीसीएस और सेल्फ असेसमेंट टैक्स की राशि घटाई जाती है। यदि रिटर्न देर से भरा गया हो या टैक्स समय पर जमा नहीं किया गया हो तो ब्याज और लेट फीस भी जोड़ी जाती है। अंत में सरचार्ज और हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़कर अंतिम टैक्स देनदारी तय की जाती है।
रिटर्न भरने से पहले करें यह जरूरी काम
आईटीआर दाखिल करने से पहले अपनी कुल आय, टीडीएस, बैंक ब्याज, निवेश और उपलब्ध टैक्स कटौतियों का मिलान जरूर कर लें। सही जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल करने से गलती की संभावना कम (ITR Filing) होती है और भविष्य में आयकर विभाग की ओर से नोटिस आने का जोखिम भी घट जाता है।
