खरीफ सीजन शुरू होते ही मिर्च की खेती को लेकर किसानों का उत्साह बढ़ता नजर (Chilli Farming) आ रहा है। पिछले साल की तुलना में इस बार बाजार में बेहतर भाव मिलने और पुराने स्टॉक में कमी आने से किसान बड़े पैमाने पर मिर्च की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस बार मिर्च का रकबा रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच सकता है।
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों ने मिर्च की खेती का दायरा बढ़ाने की योजना बनाई है। कारोबारियों का भी मानना है कि मजबूत मांग और बेहतर कीमतें इस बार किसानों का भरोसा बढ़ा रही हैं।
बेहतर कीमतों से बढ़ा किसानों का रुझान Chilli Farming
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले साल रिकॉर्ड उत्पादन के कारण किसानों को अपेक्षित दाम नहीं मिले थे, जिससे कई क्षेत्रों में मिर्च की खेती का रकबा घट गया था। लेकिन इस बार बाजार की स्थिति बदली है। मिर्च के अच्छे भाव मिलने से किसान फिर से इसकी खेती की ओर लौट रहे हैं और अधिक क्षेत्र में बुवाई की तैयारी कर रहे हैं।
कई किस्मों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
निर्यात में इस्तेमाल होने वाली तेजा और अरमूर किस्मों की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं घरेलू बाजार में अधिक मांग वाली 334 और सुपर 10 किस्मों के भाव भी लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़े हैं। हालांकि मसाला उद्योग में इस्तेमाल होने वाली कुछ पाउडर किस्मों की कीमतों में नरमी बनी हुई है।
कम स्टॉक से बाजार को मिला सहारा
कारोबारियों के मुताबिक इस समय बाजार में पिछले साल की तुलना में कैरी फॉरवर्ड स्टॉक काफी (Chilli Farming) कम है। यही वजह है कि कीमतों को लगातार समर्थन मिल रहा है। बरसात के दौरान मसालों की मांग कुछ धीमी रहती है, लेकिन अगस्त से प्रोसेसिंग कंपनियों की खरीद बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है रकबा
कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार मिर्च की खेती का रकबा करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। बीजों की बिक्री में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और सबसे ज्यादा मांग दक्षिण भारत के राज्यों से देखने को मिल रही है। हालांकि मानसून में देरी को लेकर किसानों की चिंता अभी भी बनी हुई है।
दिसंबर तक आ सकती है नई फसल
उत्तर कर्नाटक के कई इलाकों में भी किसान इस बार मिर्च की खेती को प्राथमिकता (Chilli Farming) दे रहे हैं। बारिश देर से पहुंचने के कारण नई फसल की आवक नवंबर की बजाय दिसंबर तक पहुंच सकती है। ऐसे में मौजूदा सीजन के दौरान भी मिर्च की कीमतों में मजबूती बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
