संपादकीय: दूध का दूध पानी का पानी होना जरूरी

Editorial: अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चंदा चोरी विवाद के चलते आखिरकार ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को अपने पद से त्याग पत्र देना पड़ गया वहीं श्रीराम मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राय को भी मंदिर की व्यवस्था से बाहर करने की खबर है। गौरतलब है कि मंदिर की दानराशि में सेंध लगाए जाने की शिकायत मिलने के बाद उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के वाहन चालक रहे टिन्नू यादव सहित आठ आरोपियों की गिरफ्तारी की गई और उन्हें जेल भेज दिया गया।

इसके बाद से ही चंदा चोरी के इस मामले को लेकर देशभर में बवाल मंच गया और प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी सहित अन्य पार्टियों ने इस मुद्दे को लेकर सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया था। इसके बाद मामले की जांच में तेजी आ रही है और नित नए खुलासे हो रहे हैं। जाहिर है यह करोड़ा हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा मामला है इसलिए सरकार भी फूंक फूंक कर कदम रख रही है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले का खुलासा होने के तत्काल बाद अयोध्या पहुंचे थे और उन्होंने घोषणा की थी कि इस चंदा चोरी में संलिप्त किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने 15 दिनों का समय तय किया था और एक सप्ताह के भीतर ही 8 लोगों की गिरफ्तारी भी हो गई तथा ट्रंस्ट के महासचिव तथा ट्रस्टी को अपने पद से हटना पड़ा। हालांकि यह काम पहले ही हो जाना चाहिए था। खासतौर पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को तो इस मामले के उजागर होते ही नैतिकता के नाते अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था क्योंकि मंदिर में चढ़ावे की राशि को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी उनकी ही थी और इस मामले में उनके निकठस्थ रहे लोगों पर ही आरोप लगे हैं जो अब गिरफ्तार भी हुए हैं।

कायदे से तो एसआईटी जांच की घोषणा के बाद ही मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चपंत राय सहित सभी ट्रस्टियों को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। क्योंकि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए यह आवश्यक था कि सभी ट्रस्टियों की छुट्टी कर दी जाये। किन्तु पता नहीं क्यों ऐसा नहीं किया गया इसी वजह से विपक्ष को यह आरोप लगाने का मौका मिल गया कि एसआईटी जांच के नाम पर प्रकरण में लिपा पोती की जा रही है। खासतौर पर इस मामले को लेकर सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ज्यादा मुखर हैं। 8 माह बाद उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैंं और उनके पास योगी सरकार या भाजपा के खिलाफ मुद्दों का अभाव था अब उनके हाथ में चंदा चोरी का यह बड़ा मुद्दा आ गया है जो करोड़ो हिन्दुओं की आस्था से भी जुड़ा हुआ है।

ऐसे में वे इस मुद्दे को लेकर सियासत जरूर करेंंगे और इसे आगामी विधानसभा चुनाव तक जिंदा रखने की भी कोशिश करेंंगे। इससे समाजवादी पार्टी या अन्य विपक्षी पार्टियों को कितना चुनावी लाभ मिलेगा यह कह पाना तो मुहाल है लेकिन भाजपा का इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। यदि चंदा चोरी के इस संसनीयखेज मामले की निपष्पक्ष जांच नहीं हुई और चून चून कर इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा नहीं दी गई।

यह बात उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व भी भलिभांति समझ रहा है और इस पूरे मामले पर भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व भी नजर लगाए हुए है इधर योगी आदित्यनाथ लगातार यह भरोसा दिला रहे हैं कि चंदा चोरी के मामले की निष्पक्ष जांच होगी और सभी अपराधियों को उनके किये की सजा जरूर दी जाएगी। इसके साथ ही अब सरकार को चाहिए कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में फिर ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए वहां दान में मिली राशि को सुरक्षित रखने के लिए चाक चौबंध व्यवस्था सुनिश्चित की जाये जैसा देश के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में होता है। बेहतर होगा कि पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए एक आईएएस अफसर की भी नियुक्ति की जाये।

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