संपादकीय

संपादकीय: अमेरिका को ईरान की दो टूक शब्दों में चेतावनी

Editorial: अमेरिका द्वारा ईरान को दिये गये शांति प्रस्ताव को ईरान ने ठुकरा दिया है। इसके साथ ही ईरान ने फिर अपनी पांच शर्तें रखी हैं और कहा है कि अमेरिका इस युद्ध में हुए ईरान के नुकसान की भरपाई करे और हार्मूज स्ट्रेट पर ईरान के कब्जे को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्रदान करे तथा भविष्य में ईरान पर हमला न करने की गारंटी दे तभी अमेरिका के साथ बातचीत की जाएगी।

अन्यथा ईरान इजराइल के साथ साथ अमेरिका और अमेरिका के पि_ू खाड़ी देशों पर अपना आक्रमण जारी रखेगा। अमेरिका का प्रस्ताव ठुकराने के साथ ही ईरान ने जंग के 27वें दिन भी इजराइल और खाड़ी देशों पर अपने हमले बदस्तूर जारी रखे। यही नहीं बल्कि उसने तो अमेरिकी युद्धपोत अंब्राहमलिंकन को भी निशाना बनाने का दावा किया है।

अमेरिका के एफ-18 विमान को भी मार गिराया। कुल मिलाकर ईरान समुद्र से लेकर आसमान तक अपने हमले तेज कर चुका है। इस बीच अमेरिका ने पाकिस्तान के अनुरोध पर उसे मध्यस्थता करने का मौका दिया था लेकिन पाकिस्तान की इस पहल को भी ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया और उसने होर्मूज से पाकिस्तानी जहाज को बैरंग लौटाकर यह कड़ा संदेश भी दे दिया है कि पाकिस्तान मध्यस्थता करने की गलती न करे। क्योंकि ईरान अमेरिका के किसी भी प्रस्ताव को मानने के लिए हरगिज तैयार नहीं है। अब यदि ईरान संघर्ष विराम पर विचार करेगा तो अपनी शर्तें पर ही करेगा।

जाहिर है ईरान ने अमेरिका के आगे न झुकने की कसम खा रखी है। ऐसे में अब यह जंग आगे और तेज हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान द्वारा शंाति वार्ता का प्रस्ताव ठुकराने के बाद यह चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानी तो ईरान के बाद अमेरिका अपने हमले और तेज करेगा। कुल मिलाकर इस युद्ध का अंत होता नजर नहीं आ रहा है।

ईधर इजराइल ने भी ईरान के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिये हैं और वहां के प्रधानमंत्री बेनजामिन नेतन्याहू ने बयान दिया है कि ईरान के साथ अमेरिका ने एकतरफ संघर्ष विराम किया है इजराइल ने नहीं। इजराइल तो लंबे समय तक ईरान के खिलाफ लड़ाई लड़ेगा। वास्तव में यह जंग ईरान और इजराइल के बीच ही है जिसमें अमेरिका खुद कूद पड़ा है और अब उसने अपने कदम पीछे भी हटा लिये हैं लेकिन इस जंग के चलते खाड़ी के कई देश भी जंग की चपेट में आ गये हैं जिसके चलते पूरी दुनिया में तेल और गैस का संकट गहराने लगा है। ईरान द्वारा अमेरिका के प्रस्ताव को ठुकराने के बाद अमेरिका भी ईरान के खिलाफ बड़ी कार्यवाही करेगा और कोई बड़ी बात नहीं कि यह युद्ध विश्व युद्ध के रूप में तब्दिल हो जाये। यदि ऐसा हुआ तो पूरी दुनिया को इसका खामियाजा भुगतनता पड़ेगा।

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