Iran Protest Crisis : ईरान संकट पर बढ़ी वैश्विक चिंता: ट्रंप को बताए गए सैन्य विकल्प, अमेरिका ने जताया खुला समर्थन
Iran Protest Crisis
ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर होते नजर आ रहे हैं। लगातार दो हफ्तों से सड़कों पर उतरी जनता अब केवल आर्थिक (Iran Protest Crisis) मांगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे सत्ता व्यवस्था को चुनौती दे रही है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान को लेकर संभावित सैन्य विकल्पों की जानकारी दिए जाने की खबर ने वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
अमेरिकी प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति को जिन विकल्पों से अवगत कराया गया है, उनमें सीमित और लक्षित कार्रवाई की संभावनाएं भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये विकल्प शासन से जुड़े ऐसे ढांचों पर केंद्रित हो सकते हैं, जो सीधे तौर पर आंतरिक सुरक्षा तंत्र से जुड़े हैं, न कि पारंपरिक सैन्य ठिकानों से। यह ब्रीफिंग किसी तात्कालिक फैसले से अधिक आकस्मिक रणनीति का हिस्सा बताई जा रही है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान के आम नागरिकों के प्रति समर्थन दोहराया है। उन्होंने अपने संदेश में संकेत दिया कि ईरानी जनता जिस बदलाव की ओर देख रही है, उसमें अमेरिका मदद के लिए (Iran Protest Crisis) तैयार है। उनके इस बयान को ईरान सरकार के लिए सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिकी राजनीति के भीतर भी इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। एक वरिष्ठ सीनेटर ने ईरानी जनता के साहस की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से चला आ रहा डर और दमन का दौर खत्म होने के करीब है। उनके बयान ने यह संकेत दिया कि अमेरिका केवल कूटनीतिक ही नहीं, बल्कि अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।
ईरान के भीतर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। शुरुआती तौर पर महंगाई और आर्थिक दबाव के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब शासन परिवर्तन की मांग में बदल चुका है। 1979 की क्रांति के बाद से बनी सत्ता संरचना के खिलाफ यह अब तक का सबसे बड़ा जनआंदोलन माना जा रहा है। प्रदर्शन देश के लगभग सभी हिस्सों में फैल चुके हैं और छोटे शहरों से लेकर बड़े शहरी केंद्रों तक इसका असर दिख रहा है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ईरानी प्रशासन ने इंटरनेट और संचार सेवाओं पर सख्त पाबंदियां लगाई हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का नेटवर्क पूरी तरह टूटा (Iran Protest Crisis) नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैकल्पिक तकनीकों और सैटेलाइट सेवाओं के जरिए लोग सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं। कई इलाकों से सुरक्षा बलों द्वारा फायरिंग की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिसने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।
अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि ईरान को लेकर कूटनीतिक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और अन्य विकल्पों का एक साथ मूल्यांकन किया जा रहा है। यह साफ किया गया है कि किसी भी कदम का मकसद हिंसा को रोकना और हालात को और बिगड़ने से बचाना है।
तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच पूरी दुनिया की नजरें ईरान पर टिकी हैं। यह संकट न सिर्फ मध्य पूर्व, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
