संपादकीय: मतदाताओं का अपमान करना अनुचित

Editorial: पांच राज्यों के होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इन प्रदेशों में चुनावी रैलियां शुरू हो गई हैं। जिसमें बड़बोले नेताओं के बीच विवादास्पद बयान देने की होड़ भी प्रारंभ भी हो गई है। चुनावी सभाओं में एक दूसरे को आरोप प्रत्यारोप लगाना तो फिर भी सही है लेकिन मतदाताओं का तो अपमान नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने एक चुनावी सभा के दौरान केरल के मतदाताओं की प्रशांसा के पुल बांधते हुए अन्य राज्यों के मतदाओं का अपमान कर डाला।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात सहित देश के अन्य राज्यों के गंवार लोगों को मूर्ख बना सकते हैं लेकिन केरल के लोगों को बेवकूफ नहीं बना सकते क्योंकि वे पढ़े लिखे और समझदार हैं। निश्चित रूप से उनका यह बयान देश के अन्य राज्यों के मतदाताओं का घोर अपमान है। ऐसे नेता जो मतदाताओं का भी अपमान करने से बाज नहीं आते वे अपनी ही पार्टी के लिए गढ्डा खोदने का काम करते हैं ऐसा बयान यदि कोई छुटभैय्या दे तो भी वह आपत्तिजनक है
यहां तो खुद एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष इस तरह की विवादास्पद बयानबाजी कर रहे हैं और जब नाराज मतदाता उनको वोट नहीं देते तो वे अपनी गलती का ठिकरा इवीएम पर या फिर चुनाव आयोग के सिर पर फोडऩे लगते हैं। बेहतर होगा कि चुनाव के दौरान ऐसे बयानवीर नेता अपनी जुबान पर लगाम रखे अन्यथा उनकी बदजुबानी का दुष्परिणाम उनकी पार्टी को भुगतना पड़ेगा। खातसौर पर वरिष्ठ नेताओं को तो किसी भी तरह का बयान देने से पहले संयम से काम लेना चाहिए अन्यथा उनकी देखा देखी छोटे नेता तो बदजुबानी की सीमा पार कर ही लेंगे।



