Indian Railways Superfast Era : ‘सुपरफास्ट युग’ की तैयारी, अब दो किलोमीटर पर मिलेगा रेलवे सिग्नल

Indian Railways Superfast Era

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भारतीय रेलवे अब पटरियों पर एक नए ‘सुपरफास्ट युग’ की बुनियाद रखने की तैयारी (Indian Railways Superfast Era) में है। ट्रेनों की अधिकतम गति को 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाने की योजना के तहत रेलवे बोर्ड ने सिग्नल व्यवस्था में बड़ा तकनीकी बदलाव करने का फैसला लिया है।

इसके अनुसार अब रेल पटरियों पर सिग्नलों के बीच की दूरी को मौजूदा एक किलोमीटर से बढ़ाकर दो किलोमीटर किया जाएगा, ताकि तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन में सुरक्षा और सतर्कता दोनों सुनिश्चित हो सकें।

अभी देश में अधिकांश ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित है। लेकिन भविष्य की हाई-स्पीड जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे अब ऐसे सुधारों पर काम कर रहा है, जिससे लोको पायलट को सिग्नल पहले से अधिक स्पष्ट और समय रहते दिखाई दे सके।

दक्षिण रेलवे से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

इस नई व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट दक्षिण रेलवे में शुरू किया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो इसे चरणबद्ध तरीके से देशभर के सभी रेल जोनों में लागू किया जाएगा। रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर ट्रेन को रोकने के लिए अधिक दूरी की जरूरत (Indian Railways Superfast Era) होती है। ऐसे में दो किलोमीटर का सिग्नल अंतराल लोको पायलट को पहले से मानसिक रूप से तैयार होने का समय देगा।

इससे न केवल इमरजेंसी ब्रेक लगाने की आवश्यकता कम होगी, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी घटेगी। यात्रियों के लिए यह बदलाव ज्यादा सुरक्षित, सुगम और आरामदायक यात्रा का रास्ता खोलेगा।

उच्चस्तरीय बैठकों के बाद बना फैसला

रेलवे बोर्ड के अनुसार, 15 जनवरी को अपर सदस्य (इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन) की अध्यक्षता में सभी क्षेत्रीय रेलों के प्रधान मुख्य विद्युत अभियंताओं के साथ उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसके बाद 27 जनवरी को हुई अगली बैठक में सिग्नलों की दूरी एक से बढ़ाकर दो किलोमीटर करने का सुझाव सामने आया।

इस पर सभी जोन के प्रधान मुख्य विद्युत अभियंताओं के बीच सहमति बनी। इसके बाद दक्षिण रेलवे को एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजने के निर्देश (Indian Railways Superfast Era) दिए गए हैं, ताकि इस योजना पर तुरंत काम शुरू किया जा सके।

सभी जोन को भेजा गया निर्देश

इस फैसले से जुड़े दिशा-निर्देश रेलवे बोर्ड के कार्यपालक निदेशक (विद्युत अभियांत्रिकी) वी. वेंकटसुब्रमणियन की ओर से 28 जनवरी को एनसीआर सहित सभी रेल जोनों के महाप्रबंधकों को भेजे गए हैं।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट दक्षिण रेलवे में शुरू होगा और आगे इसके नतीजों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार किया जाएगा। रेलवे का यह कदम भविष्य में हाई-स्पीड ट्रेनों के सुरक्षित संचालन की दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।

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