Indian Railways Mega Projects : रेलवे से ब्रिज तक मेगा फैसले, साउथ ब्लॉक की आखिरी कैबिनेट बैठक में ₹1.60 लाख करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी

करीब 95 वर्षों तक देश की सत्ता और नीति निर्माण का केंद्र रहा ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक (Indian Railways Mega Projects) का साक्षी बना। इस ऐतिहासिक बैठक में केंद्र सरकार ने रेलवे, नेशनल हाईवे, मेट्रो, शहरी विकास और स्टार्टअप सेक्टर से जुड़ी कुल ₹1,60,504 करोड़ की मेगा परियोजनाओं को मंजूरी देकर विकास की नई रूपरेखा पेश की। सरकार के इन फैसलों को आने वाले दशक में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विस्तार की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
1931 में उद्घाटन के बाद पहली बार केंद्र सरकार साउथ ब्लॉक से प्रशासनिक कामकाज को नए सेवा तीर्थ परिसर में स्थानांतरित करने जा रही है। इसी ऐतिहासिक बदलाव से पहले हुई अंतिम बैठक में लिए गए निर्णयों को सरकार और नीति विशेषज्ञ बेहद अहम मान रहे हैं।
रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बूस्ट
कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने ₹18,509 करोड़ की लागत से तीन बड़े रेलवे मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें कासारा–मनमाड, दिल्ली – अंबाला और बल्लारी – होसपेट सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण (Indian Railways Mega Projects) शामिल है। इन परियोजनाओं से करीब 389 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार होगा और लगभग 2.65 करोड़ मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है। सरकार का दावा है कि इससे सालाना 96 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी, 22 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी और 111 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन घटेगा।
ब्रह्मपुत्र के नीचे बनेगी ऐतिहासिक ट्विन-ट्यूब टनल
पूर्वोत्तर भारत को बड़ी सौगात देते हुए असम में गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच ₹18,662 करोड़ की लागत से 33.7 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और 15.79 किलोमीटर लंबी अंडरवाटर रोड-कम-रेल टनल को स्वीकृति दी गई है। यह परियोजना देश की पहली ऐसी ट्विन-ट्यूब टनल परियोजनाओं में शामिल होगी, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी और करीब 80 लाख मानव-दिवस रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर विशेष फोकस
तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र में नेशनल हाईवे अपग्रेडेशन के लिए भी हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं से यात्रा समय में कमी आएगी, औद्योगिक क्लस्टर्स को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी। खासतौर पर दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ाव को व्यापार और उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शहरी विकास और स्टार्टअप सेक्टर को नई रफ्तार
कैबिनेट ने 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहने वाली ₹1 लाख करोड़ की अर्बन चैलेंज फंड स्कीम को भी हरी झंडी दी है। इसके जरिए 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की शहरी परियोजनाओं को गति मिलने (Indian Railways Mega Projects) की उम्मीद है। साथ ही ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ के लिए ₹10,000 करोड़ का कॉर्पस स्वीकृत किया गया है, जिससे डीप टेक, इनोवेटिव मैन्युफैक्चरिंग और नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा।
मेट्रो नेटवर्क का विस्तार
दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक 11.56 किलोमीटर विस्तार को ₹2,254 करोड़ की मंजूरी दी गई है। इससे नोएडा और ग्रेटर नोएडा का कुल मेट्रो नेटवर्क बढ़कर 61.62 किलोमीटर हो जाएगा।
कुल मिलाकर, साउथ ब्लॉक की आखिरी कैबिनेट बैठक में लिए गए इन फैसलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार अगले दशक में इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और शहरी विकास को विकास की धुरी बनाने जा रही है।



