Indian Economy Growth 2026 : विनिर्माण व सेवा सेक्टर के दम पर भारतीय इकोनमी की रंगत तेज

Indian Economy Growth 2026

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आम बजट पेश होने से महज तीन हफ्ते पहले भारत सरकार ने चालू वित्त वर्ष की आर्थिक तस्वीर पेश की है, जो देश में तेज विकास दर की ओर संकेत करती है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा बुधवार को जारी पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।

हालांकि यह अनुमान पहली और दूसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुरूप है, लेकिन जल्द ही लागू होने वाले आधार वर्ष 2022-23 के तहत यह वृद्धि दर और ऊपर जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां जैसे आईएमएफ, विश्व बैंक और आरबीआइ ने पहले ही भारत की संभावित विकास दर में संशोधन किया है। इस दिशा में (Indian Economy Growth 2026) संकेत काफी उत्साहजनक हैं।

आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में वित्तीय, रियल एस्टेट, पेशेवर सेवाओं, सार्वजनिक प्रशासन और रक्षा में 9.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि देखने को मिली है।

वहीं व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण जैसे क्षेत्रों में भी 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है। निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जहां द्वितीयक क्षेत्र में 7.0 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। पिछले वर्ष विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 4.2 प्रतिशत रही थी। यह साफ दर्शाता है कि (Indian Economy Growth 2026) मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है और रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।

कृषि और संबद्ध क्षेत्र में 3.1 प्रतिशत और बिजली, गैस, जल आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में 2.1 प्रतिशत की मध्यम वृद्धि दर्ज की गई। कृषि क्षेत्र में मंदी सरकार के लिए चिंता का विषय है, खासकर वर्ष 2026 में मानसून कमजोर होने की संभावनाओं को देखते हुए।

नोमिनल जीडीपी में 8.0 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जो 357.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में 7.0 प्रतिशत और सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी निवेश और उपभोग दोनों में सकारात्मक संकेत देती है।

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि चालू वित्त वर्ष में प्रति व्यक्ति आय 6.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,42,119 रुपये तक पहुंच सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष के 1,33,501 रुपये से ऊपर है। वैश्विक चुनौतियों जैसे भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका की शुल्क नीतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy Growth 2026) तेज गति से आगे बढ़ रही है।