
पत्र सूचना कार्यालय द्वारा आयोजित मीडिया टूर के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 14 सदस्यीय पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना की पश्चिमी कमान के मुख्यालय, चंडीमंदिर (चंडीगढ़ के निकट) का विस्तृत एवं प्रेरणादायक (Indian Army Western Command Visit) दौरा किया।
यह यात्रा न केवल एक औपचारिक भ्रमण थी, बल्कि भारतीय सेना की कार्यप्रणाली, रणनीतिक सोच, ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्र सुरक्षा के प्रति उसके अटूट समर्पण को समझने का एक जीवंत अनुभव भी साबित हुई। (Indian Army Western Command Visit)
इस मीडिया टूर का प्रमुख उद्देश्य सेना और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, पारदर्शिता को बढ़ावा देना तथा जिम्मेदार, तथ्यात्मक और राष्ट्रहित में पत्रकारिता को प्रोत्साहित करना रहा। आज के समय में जब सूचना का प्रवाह अत्यंत तीव्र और व्यापक हो चुका है, ऐसे में मीडिया की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी परिप्रेक्ष्य में यह पहल सेना और पत्रकारों के बीच विश्वास, संवाद और समझ को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यालय में ब्रिगेडियर जी.एस. बेदी (बीजीएस, सूचना विभाग) सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से संवाद किया। अधिकारियों ने पत्रकारों को पश्चिमी कमान की परिचालन क्षमता, संरचना, जिम्मेदारियों तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में निभाई जा रही भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं पर लड़े जाने वाले संघर्ष तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें सूचना, साइबर, तकनीक और जनसंचार का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।
दौरे के दौरान पत्रकारों को मुख्यालय परिसर में स्थापित पश्चिमी कमान संग्रहालय का भ्रमण कराया (Indian Army Western Command Visit) गया, जो सेना की गौरवशाली विरासत का सजीव दस्तावेज है। संग्रहालय में 1947-48 के दौर से लेकर आज तक के महत्वपूर्ण अभियानों, युद्धों और सैन्य उपलब्धियों को व्यवस्थित रूप से प्रदर्शित किया गया है। विशेष रूप से 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानी सेना से कब्जे में लिया गया टैंक यहां प्रमुख आकर्षण का केंद्र है, जो भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक कौशल का प्रतीक है।
इसके अतिरिक्त पत्रकारों को 1947 के विभाजन के समय की परिस्थितियों से अवगत कराया गया, जब अत्यंत चुनौतीपूर्ण हालात में सेना ने सीमाओं की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा का दायित्व निभाया। उस समय युद्ध संचालन के लिए रेल की बोगियों में बनाए गए अस्थायी वॉर रूम की जानकारी भी दी गई, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद सेना की अद्भुत कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को दर्शाया।
इस दौरे का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली हिस्सा फिल्म स्क्रीनिंग रहा। पत्रकारों को विशेष रूप से तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के माध्यम से पश्चिमी कमान का समूचा इतिहास विस्तार से दिखाया गया। इन फिल्मों में 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान कमान की निर्णायक भूमिका, सैन्य रणनीतियों, सैनिकों के अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। फिल्म के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि कैसे पश्चिमी कमान ने हर चुनौती का सामना करते हुए देश की सीमाओं की रक्षा सुनिश्चित की।
इसी क्रम में पत्रकारों को हाल ही में संचालित ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। फिल्म और प्रस्तुतियों के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार इस अभियान के दौरान सेना ने आतंकवादी ठिकानों और शत्रु के रणनीतिक अड्डों पर सटीक और प्रभावी कार्रवाई की। ऑपरेशन के दौरान थल सेना और वायु सेना के बीच उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप सीमित समय में महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किए गए। इस अभियान ने आधुनिक युद्ध में तकनीकी दक्षता, त्वरित निर्णय क्षमता और संयुक्त सैन्य संचालन की आवश्यकता को रेखांकित किया।
पत्रकारों को यह भी बताया गया कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की रणनीतिक दृढ़ता और आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति का स्पष्ट संदेश था। इस ऑपरेशन के दौरान सेना ने अत्यंत संयम, सटीकता और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की सैन्य क्षमता और विश्वसनीयता में वृद्धि हुई।
पश्चिमी कमान भारतीय सेना की प्रमुख परिचालनात्मक कमानों में से एक है, जिसका मुख्यालय चंडीमंदिर में स्थित है। यह कमान देश की पश्चिमी सीमाओं, विशेषकर पंजाब सेक्टर, की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है। इसके अंतर्गत पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से और जम्मू-कश्मीर के कुछ क्षेत्र आते हैं। यह कमान हर समय युद्ध के लिए तैयार रहती है और आक्रामक तथा रक्षात्मक दोनों प्रकार के अभियानों को संचालित करने में सक्षम है।
कमान की संगठनात्मक संरचना भी अत्यंत सुदृढ़ और बहुआयामी है। इसमें आर्टिलरी, इन्फैंट्री, आर्मर्ड, एयर डिफेंस और इंजीनियरिंग जैसी विभिन्न इकाइयाँ शामिल हैं, जो आधुनिक युद्ध की सभी आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। पत्रकारों को इन इकाइयों की भूमिका और कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, जिससे उन्हें सेना की व्यापक तैयारियों और रणनीतिक सोच का स्पष्ट अंदाजा हुआ।
इतिहास के परिप्रेक्ष्य में भी पश्चिमी कमान का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण (Indian Army Western Command Visit) रहा है। 1965 के भारत-पाक युद्ध में लेफ्टिनेंट जनरल हरबक्श सिंह के नेतृत्व में इस कमान ने पंजाब सेक्टर में पाकिस्तान के आक्रमण को प्रभावी रूप से विफल किया। असल उत्तर और हाजी पीर पास जैसी महत्वपूर्ण लड़ाइयों में भारतीय सेना ने अद्वितीय साहस और रणनीति का प्रदर्शन किया।
1971 के युद्ध में भी पश्चिमी कमान ने पश्चिमी मोर्चे पर निर्णायक भूमिका निभाई और पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाया। इन युद्धों में प्राप्त सफलताओं ने भारतीय सेना की क्षमता और दृढ़ संकल्प को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।
दौरे के दौरान ‘Military-Civil Fusion’ और ‘Whole of Nation Approach’ की अवधारणाओं पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक समय में राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें नागरिक समाज, मीडिया, उद्योग और विभिन्न संस्थानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मीडिया, एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में, सही और संतुलित जानकारी के माध्यम से समाज में जागरूकता और विश्वास का निर्माण करता है।
यह मीडिया टूर पत्रकारों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। उन्हें प्रत्यक्ष रूप से यह देखने और समझने का अवसर मिला कि भारतीय सेना किस प्रकार सीमाओं की सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रही है। अधिकारियों के साथ संवाद ने पत्रकारों को उनकी जिम्मेदारी और भूमिका के प्रति और अधिक सजग किया।
इस यात्रा ने न केवल पश्चिमी कमान की सैन्य शक्ति और रणनीतिक क्षमता को उजागर (Indian Army Western Command Visit) किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि भारतीय सेना किस प्रकार अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति के उच्चतम मानकों का पालन करती है। छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के लिए यह अनुभव उनके पेशेवर जीवन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
अंततः यह कहा जा सकता है कि इस प्रकार के मीडिया टूर सेना और नागरिक समाज के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। ये पहलें न केवल पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ाती हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सामूहिक सहभागिता को भी सशक्त बनाती हैं। पश्चिमी कमान आज भी देश की सुरक्षा का एक अडिग स्तंभ है, जो हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और राष्ट्र की रक्षा के अपने संकल्प पर अटल है।



