छत्तीसगढ़

Humanity Service Bhilai : कदम रुकते नहीं, सहारा मिलता है, ‘सुलभ पोर्टर सेवा’ बन रही बुजुर्गों और असहाय मरीजों की ताक़त

दुर्ग–भिलाई के व्यस्ततम मेडिकल गलियारों में अक्सर इलाज से ज्यादा चिंता (Humanity Service Bhilai) इस बात की होती है कि मरीज वार्ड तक कैसे पहुंचेगा—खासकर तब, जब साथ कोई सहारा न हो। लेकिन जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के एक कोने में आश्वासन की एक ऐसी रोशनी जलती है, जहां थकते कदमों को सहारा मिलता है और अकेलापन धीरे-धीरे पीछे छूट जाता है। 01 अक्टूबर 2024 से शुरू हुई ‘सुलभ पोर्टर सेवा’ ने शहर के स्वास्थ्य ढांचे में एक नई मानवीय पहचान जोड़ी है।

https://youtu.be/YPQD9mJE2F0

यह सेवा भिलाई इस्पात संयंत्र के CSR सहयोग और सुलभ इंटरनेशनल की भागीदारी से चलाई जा रही है। उद्देश्य सीधा है— जिस मरीज का हाथ थामने वाला कोई नहीं, उसके लिए मदद हमेशा मौजूद रहे। टीम रोज़ अस्पताल पहुंचने वाले वृद्ध, दुर्घटना-पीड़ित, चलने-फिरने में असमर्थ या अकेले आए मरीजों को व्हीलचेयर द्वारा ओपीडी, कैजुअल्टी व अन्य विभागों तक सुरक्षित ले जाती है। पोर्टर्स का काम सिर्फ पहियों को आगे बढ़ाना नहीं—वे मनोबल भी थामते हैं। कई मरीज मुस्कुराकर कहते हैं, “अब अस्पताल डर नहीं लगता, कोई साथ चलता है।”

तीन शिफ्टों में 18 प्रशिक्षित पोर्टर्स लगातार सेवाएं देते हैं। नीली वर्दी और ‘सर्विस विथ स्माइल’ उनकी पहचान बन चुकी है। जेएलएन अस्पताल में रोज़ ऐसा दृश्य दिख जाता है जहां किसी वृद्ध की व्हीलचेयर को हल्के हाथों से धकेलते पोर्टर उसके दिल में भरोसा भरते नज़र आते हैं। औसतन 2500 से अधिक मरीज हर महीने इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं, जिनमें अधिकांश बुजुर्ग हैं, जो कई बार अस्पताल की भीड़ में खुद को असहाय महसूस करते थे।

सुलभ टीम के वॉलंटियर देवेंद्र कुमार बताते हैं कि “जब किसी की आंखों में डर होता है, हमारा काम उन्हें सिर्फ पहुंचाना नहीं, बल्कि यह महसूस करवाना होता है कि वे अकेले नहीं हैं। यही संतोष हमारी ताक़त है। ये शब्द ही सेवा की आत्मा को समझाते हैं।

https://youtu.be/LbUs1HMXTx4

करुणा पर आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था

यह पहल दिखाती है कि स्वास्थ्य सेवा केवल दवाइयों और मशीनों का ढांचा नहीं—यह दिल से जुड़ी व्यवस्था है। भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रशासन, उपकरण उपलब्धता, प्रशिक्षण और सुलभ इंटरनेशनल की विशेषज्ञता मिलकर इस सेवा को मजबूत आधार देती है। इसी भरोसे पर निर्भर बुजुर्गों ने इसे जारी रखने की अपील भी की है, क्योंकि उनके लिए यह सेवा दूरी नहीं, सहारा कम करती है।

जब अस्पताल के भीतर सुरक्षा, सम्मान और करुणा प्राथमिक हो जाएं—तो वहां इलाज उपचार से आगे बढ़कर मानवता बन जाता है। ‘सुलभ पोर्टर सेवा’ इसी विचार को जीवित रखे हुए है। यह बताती है कि समाज वही कहलाता है, जहां सबसे कमजोर हाथ भी अकेला न छूटे।

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