Hormuz Strait : तेल संकट के बीच भारत की बड़ी तैयारी, अब होर्मुज रास्ते को लेकर बढ़ी हलचल

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारत की नई तैयारी ने रणनीतिक हलकों में हलचल (Hormuz Strait) बढ़ा दी है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार और समुद्री एजेंसियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच भारत की नजर अब उस समुद्री रास्ते पर टिकी है जहां से दुनिया की बड़ी तेल सप्लाई गुजरती है।

बीते कुछ महीनों से खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित रही है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी महसूस किया गया। अब हालात बदलने की उम्मीद के बीच भारत फिर से पुराने समुद्री मार्ग को सक्रिय करने की तैयारी में दिखाई दे रहा है।

होर्मुज रास्ते से फिर शुरू हो सकती है सप्लाई : Hormuz Strait

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने पश्चिम एशिया से तेल और गैस लाने के लिए जहाज भेजने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलते ही भारतीय टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते खाड़ी देशों की ओर रवाना हो सकते हैं। ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहला मौका होगा जब भारत इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से बड़े स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बहाल करने की कोशिश करेगा।

दुनिया का अहम ऊर्जा मार्ग

होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। लेकिन ईरान संघर्ष के बाद यहां आवाजाही लगभग ठप जैसी स्थिति में पहुंच गई थी। सूत्रों के अनुसार पूरी योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है और जहाजों की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।

सुरक्षा मंजूरी का इंतजार

बताया जा रहा है कि शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने खाड़ी क्षेत्र में फिर से संचालन शुरू करने की तैयारी (Hormuz Strait) कर ली है। हालांकि भारतीय नौसेना और केंद्र सरकार की अंतिम सुरक्षा मंजूरी का इंतजार अभी बाकी है। भारत के लिए यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि देश अब भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर काफी हद तक निर्भर है।

नौसेना ने बढ़ाई निगरानी

रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने समुद्री सुरक्षा को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। क्षेत्र में भारतीय युद्धपोतों की संख्या बढ़ाई गई है और हवाई निगरानी भी मजबूत की गई है। भारतीय नौसेना उन जहाजों को सुरक्षा दे रही है जो होर्मुज क्षेत्र से बाहर निकल रहे हैं या भारत की ओर आ रहे हैं।

विदेश मंत्री स्तर पर भी हुई चर्चा

हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में हुई ब्रिक्स बैठक के दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि इस दौरान होर्मुज क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा और भारतीय जहाजों की आवाजाही को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि भारत को इस मार्ग से जहाज भेजने के लिए सभी पक्षों से औपचारिक अनुमति मिली है या नहीं।

अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा असर

तेल संकट और बढ़ती कीमतों का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। आयात बिल बढ़ने और रुपये पर दबाव के कारण चिंता बढ़ी है। ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य बनाए रखना भारत के लिए अहम चुनौती माना जा रहा है।

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