छत्तीसगढ़

High Court Relief : भोजराज नाग को बड़ी राहत, चुनाव रद्द करने की मांग पर कोर्ट ने क्या कहा

बिलासपुर में आज आए इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल (High Court Relief) बढ़ा दी है। हाईकोर्ट रिलीफ मिलने के बाद सांसद भोजराज नाग के समर्थकों में राहत की भावना दिखी, वहीं विरोधी पक्ष के बीच अब आगे की रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कोर्ट के फैसले के बाद लोगों के बीच भी चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम को लेकर बातचीत फिर से शुरू हो गई है।

इस high court relief मामले को लेकर आम लोगों की भी अलग अलग प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोग इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं, तो कुछ अब भी सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। हालांकि फिलहाल कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिना ठोस सबूत के ऐसे गंभीर आरोपों पर आगे बढ़ना संभव नहीं है।

याचिका पर फैसला (High Court Relief)

वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर से सामने आई जानकारी के मुताबिक कांकेर से निर्वाचित सांसद भोजराज नाग को हाईकोर्ट से राहत मिली है। उनके खिलाफ तत्कालीन प्रत्याशी बीरेश ठाकुर ने ईवीएम में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए चुनाव निरस्त करने की याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

सबूत पर कोर्ट की सख्ती

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मशीनों की दोबारा जांच का आदेश तभी दिया जा सकता है, जब गड़बड़ी से जुड़े मौखिक या दस्तावेजी प्रमाण रिकॉर्ड पर पेश किए जाएं। बिना किसी ठोस आधार के इस तरह की जांच के निर्देश जारी नहीं किए जा सकते।

हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता के पास आगे चलकर कोई ठोस डॉक्यूमेंट या मौखिक साक्ष्य आता है, तो वह नई एप्लीकेशन दाखिल (High Court Relief) कर सकता है।

ईवीएम जांच की मांग

हाईकोर्ट में यह आवेदन कांकेर संसदीय सीट से उम्मीदवार रहे बीरेश ठाकुर की ओर से दाखिल किया गया था। उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर को निर्देश देने की मांग की थी कि 26 अप्रैल 2024 को हुए चुनाव में इस्तेमाल ईवीएम मशीनों की जांच और वेरिफिकेशन कराई जाए।

इसमें बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपेट यूनिट की जांच की बात कही (High Court Relief) गई थी ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

चुनाव प्रक्रिया पर आरोप

इलेक्शन पिटीशन में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हुई। उनके मुताबिक रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कई तरह की गड़बड़ियों और अनियमितताओं का जिक्र किया गया, जिससे परिणाम प्रभावित होने की बात कही गई।

मशीन नंबर में अंतर का दावा

पिटीशनर ने यह भी दावा किया कि दूसरी रैंडमाइजेशन रिपोर्ट में मशीन नंबर और अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों जैसे गुंडरदेही, सिहावा, संजरीबालोड, डोंडी लोहारा और केशकाल के पोलिंग स्टेशनों के फॉर्म 17सी में दर्ज मशीन नंबरों में अंतर पाया गया है।

गिनती में गड़बड़ी पर कोर्ट का रुख

कोर्ट ने कानूनी स्थिति और दलीलों को देखते हुए माना कि फिलहाल गिनती में गड़बड़ी के पर्याप्त सबूत रिकॉर्ड पर नहीं हैं। ऐसे में ईवीएम की दोबारा जांच का आदेश देना उचित नहीं होगा।

नई याचिका की छूट

याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह छूट (High Court Relief) दी है कि वह कांकेर संसदीय क्षेत्र के संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में वोटों की गिनती में गड़बड़ी से जुड़े ठोस सबूत इकट्ठा कर नई एप्लीकेशन फाइल कर सकता है।

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