छत्तीसगढ़

High Court Divorce Case : बिना पर्याप्त कारण पत्नी ने बनाई दूरी, हाईकोर्ट ने माना क्रूरता…15 लाख गुजारा भत्ता के साथ मंजूर हुआ तलाक…

High Court Divorce Case : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम पारिवारिक विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए पति की तलाक की अर्जी को मंजूरी दी और पत्नी को 15 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश पारित किया। कोर्ट ने माना कि बिना पर्याप्त कारण वैवाहिक जीवन से दूरी बनाना पति के प्रति क्रूरता की श्रेणी में आता है।

यह मामला कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र का है, जहां दंपति वर्ष 2011 से अलग रह रहे थे। पति एसईसीएल में माइनिंग सरदार के पद पर कार्यरत है। उसकी शादी 11 फरवरी 2010 को हुई थी और विवाह के बाद बेटी का जन्म हुआ। इसके कुछ समय बाद दंपति के बीच विवाद गहराने लगे।

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पति का आरोप था कि पत्नी ने वैवाहिक दायित्व निभाने से इनकार कर दिया और परिवार से अलग रहने का दबाव बनाया। वहीं पत्नी ने दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण के मामले दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि लड़की होने पर ससुराल पक्ष का रवैया बदल गया और उन्होंने 5 लाख रुपये की मांग करते हुए उत्पीड़न(High Court Divorce Case) शुरू कर दिया।

सेशन कोर्ट ने 2019 में पति और उसके परिवार को सभी आपराधिक आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन पत्नी अलग ही रही। पति ने 2015 में तलाक की अर्जी दायर की थी, जिसे 2017 में कटघोरा फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील की।

जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि पति-पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हैं और पुनर्मिलन की संभावना नहीं है। पत्नी द्वारा लगाए गए आपराधिक आरोपों ने पति को मानसिक पीड़ा दी, लेकिन पत्नी कोई वाजिब कारण साबित नहीं कर पाई।

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अदालत ने तलाक की डिक्री जारी करते हुए आदेश दिया कि पति छह माह के भीतर पत्नी को 15 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता अदा करे। इसके साथ ही 14 साल पुराना विवादित रिश्ता कानूनी(High Court Divorce Case) रूप से समाप्त हो गया।

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