GST Tax Fraud Case : फर्जी फर्मों का जाल, 48 करोड़ का खेल उजागर, 2 सलाखों में

GST Tax Fraud Case

GST Tax Fraud Case

छत्तीसगढ़ में जीएसटी प्रणाली को छलनी करने वाले एक बड़े और संगठित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश (GST Tax Fraud Case) हुआ है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआइ), रायपुर ने फर्जी जीएसटी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये के टैक्स फ्राड का खुलासा करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

यह मामला न केवल आर्थिक अपराध की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह सुनियोजित नेटवर्क बनाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा था।

डीजीजीआइ रायपुर ने इस मामले में अमन कुमार अग्रवाल और विक्रम मंधानी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार दोनों आरोपितों ने फर्जी कंपनियों का संगठित नेटवर्क तैयार कर बिना किसी वास्तविक वस्तु या सेवा की आपूर्ति किए इनपुट टैक्स क्रेडिट को आगे पास किया। यह पूरा मामला एक बड़े जीएसटी टैक्स फ्राड (GST Tax Fraud Case) की ओर इशारा करता है, जिसकी जड़ें काफी गहरी बताई जा रही हैं।

जानकारी के मुताबिक 19 दिसंबर को डीजीजीआइ की टीम ने रायपुर के मैग्नेटो मॉल स्थित मेसर्स प्रेम एंटरप्राइजेज में तलाशी कार्रवाई की थी। इस दौरान बड़ी संख्या में कागजी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज, फर्जी लेन-देन के रिकॉर्ड और संदिग्ध डिजिटल सबूत सामने आए। अधिकारियों ने मौके से करीब 20 सिम कार्ड बरामद किए, जिनका इस्तेमाल फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराने और कंपनियों के नाम पर फर्जी गतिविधियां संचालित करने में किया जा रहा था।

जांच में यह भी सामने आया है कि इन फर्जी फर्मों से जुड़े कई ई-मेल आईडी विक्रम मंधानी द्वारा संचालित किए जा रहे थे। विक्रम के पास से 50 से अधिक फर्जी फर्मों के जीएसटी लॉगिन आईडी और पासवर्ड बरामद किए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरा नेटवर्क एक ही नियंत्रण में चल रहा था। अधिकारी इसे एक प्रोफेशनल और योजनाबद्ध आर्थिक अपराध मान रहे हैं।

(GST Tax Fraud Case) 48 करोड़ के फर्जी इनवाइस

डीजीजीआइ के प्रारंभिक डेटा विश्लेषण में सामने आया है कि फर्जी फर्मों के जरिए करीब 48 करोड़ रुपये के इनवाइस जारी किए गए थे, जिनमें लगभग नौ करोड़ रुपये का जीएसटी शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा शुरुआती जांच पर आधारित है और आगे की जांच में घोटाले की रकम और बढ़ सकती है। बैंक खातों, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और डिजिटल ट्रेल की गहन जांच की जा रही है।

डीजीजीआइ रायपुर ने दोनों आरोपितों को 20 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 21 दिसंबर को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने अमन कुमार अग्रवाल और विक्रम मंधानी को दो जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

अमन फिर गिरफ्त में, पुराना इतिहास भी आया सामने

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अमन कुमार अग्रवाल पहले भी जीएसटी फर्जीवाड़े के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। छत्तीसगढ़ राज्य जीएसटी विभाग ने उसे 10 जून 2025 को इसी तरह के एक मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बावजूद उसने दोबारा फर्जी कंपनियों का नेटवर्क खड़ा कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार यह दर्शाता है कि आरोपी आदतन आर्थिक अपराधी है।

डीजीजीआइ अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित जीएसटी फ्राड नेटवर्क है, जिसकी कड़ियां अन्य राज्यों तक फैली हो सकती हैं। मामले में अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका, शेल कंपनियों और वित्तीय लेन-देन की परतें खोली जा रही हैं। अधिकारियों ने साफ कहा है कि जीएसटी प्रणाली के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।