छत्तीसगढ़

Godawari Ispat Land Deal CG : 295 एकड़ जमीन 28 लाख में? विधानसभा में गूंजा ‘सस्ती डील’ का मुद्दा, मंत्री जवाब में घिरे

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को जमीन आवंटन का मुद्दा जोरदार तरीके (Godawari Ispat Land Deal CG) से उठा, जब गोदावरी इस्पात को कथित तौर पर बेहद कम कीमत पर बड़ी जमीन देने का मामला सदन में गूंज गया। विपक्ष ने सरकार पर सवालों की बौछार कर दी, लेकिन उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन कई अहम सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।

कौड़ियों के दाम में जमीन देने का आरोप

विधायक चातुरी नंद और द्वारिकाधीश यादव ने आरोप लगाया कि महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र में करीब 102.93 हेक्टेयर (लगभग 295 एकड़) शासकीय जमीन गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड को बेहद कम दर पर लीज पर दी गई।

बताया गया कि यह जमीन करीब 4.82 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से 99 साल के लिए आवंटित की गई, जिसे विपक्ष ने “कौड़ियों के मोल” की डील बताया।

ग्रामसभा के विरोध के बावजूद आवंटन पर सवाल

विधायकों ने यह भी मुद्दा उठाया कि स्थानीय ग्रामीणों और ग्रामसभा के विरोध के बावजूद जमीन का आवंटन कैसे किया गया। उन्होंने पूछा कि किन नियमों और प्रक्रियाओं के तहत यह फैसला (Godawari Ispat Land Deal CG) लिया गया, और क्या अन्य कंपनियों को भी मौका दिया गया था या नहीं।

सवालों की बौछार, जवाब देने में उलझे मंत्री(Godawari Ispat Land Deal CG)

सदन में जब जमीन आवंटन की प्रक्रिया, टेंडर और प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल पूछे गए, तो मंत्री स्पष्ट जवाब देने के बजाय अलग-अलग बिंदुओं पर बात करते नजर आए। इस पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार मामले को टाल रही है और संबंधित अधिकारियों को बचाने की कोशिश हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन उल्लंघन का भी आरोप

विधायक चातुरी नंद ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि जमीन आवंटन के बाद कंपनी द्वारा तालाब और नाले को पाटने जैसे काम भी किए गए, जिससे ग्रामीणों के जीवन पर असर पड़ रहा है।

सरकार का पक्ष – जांच के बाद होगी कार्रवाई

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने जवाब में कहा कि इस मामले में पहले भी शिकायतें (Godawari Ispat Land Deal CG) मिली थीं और कलेक्टर स्तर पर जांच समिति गठित की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अब जांच और सियासत दोनों पर नजर

यह मामला अब केवल जमीन आवंटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सियासी विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया है। एक ओर विपक्ष इसे बड़ा घोटाला बता रहा है, वहीं सरकार जांच के बाद कार्रवाई की बात कह रही है, ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

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