पीएम-किसान सम्मान योजना की 24वीं किस्त जारी
रायपुर। त्योहारी सीजन के बीच केंद्र सरकार ने देश के अन्नदाताओं को आर्थिक संबल प्रदान करते हुए पीएम-किसान योजना (Gift to Farmers Before Diwali) की बहुप्रतीक्षित 24वीं किस्त हस्तांतरित कर दी है। गुजरात के बनासकांठा स्थित भीलड़ी में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंगल क्लिक के जरिए देशभर के किसानों के खातों में 18,680 करोड़ रुपये की सम्मान राशि भेजी।
इस योजना (Gift to Farmers Before Diwali) के तहत अब तक 23 किस्तें सफलतापूर्वक किसानों तक पहुंचाई जा चुकी थीं और दिवाली से ठीक पहले 24वीं किस्त जारी होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती-किसानी से जुड़े परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने रिमोट का बटन दबाकर डीबीटी प्रणाली के माध्यम से 9.34 करोड़ किसानों के खातों में दो-दो हजार रुपये की किस्त भेजी। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक यह पारदर्शी डिजिटल लेन-देन का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसमें बिना किसी बिचौलिए या दलाली के पूरी राशि शत-प्रतिशत लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा होती है।
उत्तर प्रदेश को मिला सबसे ज्यादा पैसा
इस 24वीं किस्त (Gift to Farmers Before Diwali) के वितरण में देशभर के सभी राज्यों में उत्तर प्रदेश शीर्ष स्थान पर रहा है। राज्य के 2.24 करोड़ से अधिक पात्र किसान परिवारों के बैंक खातों में कुल 4,482.19 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर की गई है। इसके साथ ही पीएम-किसान योजना की शुरुआत (2018-19) से लेकर अब तक केवल उत्तर प्रदेश के किसानों को इस योजना से मिलने वाली कुल धनराशि 1,07,943 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है।
छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों को भी मिला बड़ा लाभ
हिंदी भाषी राज्यों में कृषि क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के किसानों को भी इस राष्ट्रव्यापी किस्त का व्यापक लाभ मिला है। राज्य के 80 लाख से अधिक पात्र किसानों के खातों में करीब 1,600 करोड़ रुपये की सम्मान राशि पहुंची है। राजस्थान के करीब 65 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों के खातों में 1,300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई है। वहीं धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के करीब 25 लाख से अधिक किसान परिवारों के खातों में 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित हुई है।
सख्ती के चलते 10 लाख से अधिक अपात्र नाम सूची से बाहर
योजना में पूरी पारदर्शिता और केवल वास्तविक किसानों तक लाभ पहुंचाने के लिए भू-अभिलेखों का सत्यापन और ई-केवाईसी प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया गया है। इस सघन जांच और तकनीकी सत्यापन के चलते इस बार देश भर में 10 लाख से अधिक ऐसे लोगों के नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए गए हैं जो योजना के तय पात्रता मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे या जिनके दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गईं।
