G-RAMJI Act : जी-रामजी अधिनियम में काम नहीं तो भत्ते की गारंटी, 15 दिन में हक तय

G-RAMJI Act

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ग्रामीण भारत में बेरोज़गारी और अनिश्चित रोज़गार से जूझ रहे परिवारों के लिए विकसित भारत रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी जी-रामजी अधिनियम (G-RAMJI Act) एक ठोस भरोसे के रूप में सामने आया है।

यह कानून पहली बार बेरोज़गारी भत्ते को केवल कल्याणकारी सहायता नहीं, बल्कि कानूनी और बाध्यकारी अधिकार के रूप में स्थापित करता है। अधिनियम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सरकार की जवाबदेही स्पष्ट की गई है—यदि समय पर काम नहीं दिया गया, तो भत्ता देना अनिवार्य होगा।

कानून के तहत किसी भी पात्र ग्रामीण परिवार का वयस्क सदस्य जब योजना के अंतर्गत रोज़गार की मांग करता है, तो राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि उसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम उपलब्ध कराया जाए।

जी-रामजी अधिनियम (G-RAMJI Act) में इस समय-सीमा को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं छोड़ी गई है। आवेदन की तारीख से या जिस दिन से काम मांगा गया है, उसके 15 दिनों के भीतर यदि रोजगार नहीं मिलता, तो आवेदक स्वतः दैनिक बेरोज़गारी भत्ते का हकदार हो जाता है।

अधिनियम यह भी साफ करता है कि बेरोज़गारी भत्ते का भुगतान राज्य सरकार को ही करना होगा। इसे टालने, लंबित रखने या प्रशासनिक बहाने बनाने की कोई गुंजाइश कानून में नहीं छोड़ी गई है। यह प्रावधान ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

भत्ते की दर तय करने का अधिकार भले ही राज्य सरकारों को दिया गया हो, लेकिन कानून ने इसमें मनमानी की संभावना लगभग समाप्त कर दी है। जी-रामजी अधिनियम (G-RAMJI Act) के तहत न्यूनतम सीमा स्पष्ट रूप से तय की गई है। किसी वित्तीय वर्ष के पहले 30 दिनों के लिए बेरोज़गारी भत्ता संबंधित क्षेत्र की अधिसूचित मजदूरी दर के कम से कम एक-चौथाई से कम नहीं हो सकता।

इसके बाद की अवधि के लिए यह राशि मजदूरी दर के कम से कम आधे के बराबर या उससे अधिक होना अनिवार्य है। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि भत्ता केवल प्रतीकात्मक न होकर वास्तविक आर्थिक सहारा बने।

कानून यह भी स्पष्ट करता है कि किन परिस्थितियों में राज्य सरकार की बेरोज़गारी भत्ता देने की जिम्मेदारी समाप्त हो जाएगी। यदि ग्राम पंचायत या सक्षम प्राधिकारी आवेदक को काम पर रिपोर्ट करने का निर्देश देता है और वह काम उपलब्ध करा दिया जाता है, तो उस अवधि के लिए भत्ता देय नहीं होगा। इसी तरह यदि परिवार के किसी अन्य वयस्क सदस्य को रोजगार मिल जाता है, तो उस समय के लिए बेरोज़गारी भत्ता नहीं दिया जाएगा।

इसके अलावा, यदि जिस अवधि के लिए रोजगार की मांग की गई थी वह समाप्त हो जाती है, या परिवार का कोई वयस्क सदस्य प्रस्तावित काम स्वीकार करने से इनकार कर देता है, तो भत्ते का दावा स्वतः समाप्त हो जाएगा।

जी-रामजी अधिनियम (G-RAMJI Act) यह भी तय करता है कि किसी एक वित्तीय वर्ष में यदि परिवार के वयस्क सदस्यों को कुल मिलाकर कम से कम 125 दिन का रोजगार मिल चुका है, तो उसके बाद बेरोज़गारी भत्ते का दावा नहीं किया जा सकता।

इतना ही नहीं, यदि मजदूरी और बेरोज़गारी भत्ता मिलाकर कुल भुगतान 125 दिन की मजदूरी के बराबर राशि तक पहुंच जाता है, तो उसके बाद अतिरिक्त भत्ता देने का प्रावधान नहीं है। इस सीमा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ अधिकतम जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे और संसाधनों का संतुलित उपयोग हो।

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