First Police Commissioner Raipur : पहले पुलिस कमिश्नर की दौड़ में गर्ग और झा सबसे आगे

First Police Commissioner Raipur

First Police Commissioner Raipur

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिसिंग के इतिहास में नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के साथ ही अब पूरे राज्य की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर कौन होगा।

इस अहम पद के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों पर विचार चल रहा है, जिनमें दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उन्हें पहला पुलिस कमिश्नर (First Police Commissioner Raipur) बनाए जाने की संभावना सबसे अधिक है।

हालांकि शासन स्तर पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है और अंतिम समय में समीकरण बदलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा। ऐसी स्थिति में सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा का नाम भी एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आ रहा है।

झा को एक सुलझे हुए अधिकारी के रूप में देखा जाता है और विभिन्न जिलों में उनके कार्यकाल को लेकर सकारात्मक फीडबैक रहा है। यही कारण है कि पुलिस कमिश्नर नियुक्ति (First Police Commissioner Raipur) की दौड़ में उनका नाम भी गंभीरता से लिया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, इन दो नामों के अलावा बिलासपुर रेंज के आईजी संजीव शुक्ला, बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. और आईजी अजय यादव के नामों पर भी शासन स्तर पर मंथन किया जा रहा है।

हालांकि फिलहाल गर्ग और झा ही सबसे आगे बताए जा रहे हैं। शासन स्तर पर यह चर्चा भी है कि शुक्रवार तक पुलिस कमिश्नर समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति के आदेश जारी किए जा सकते हैं।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी और राजधानी में कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा। अब तक एसपी और कलेक्टर आधारित व्यवस्था में कई मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी हो जाती थी।

कमिश्नरी प्रणाली में पुलिस आयुक्त को सीधे कई अधिकार मिलने से त्वरित निर्णय संभव हो पाएंगे, जिससे अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और आपात स्थितियों से निपटने में सहूलियत होगी। यही कारण है कि नई पुलिस व्यवस्था (First Police Commissioner Raipur) को राजधानी के लिए एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

आईएएस-आईपीएस टकराव खुलकर आया सामने

हालांकि इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच अधिकारों को लेकर टकराव भी खुलकर सामने आ गया है। सूत्रों के अनुसार पुलिस विभाग ने कमिश्नर को अधिक प्रशासनिक अधिकार देने की मांग की थी, लेकिन आईएएस लॉबी ने इस पर आपत्ति जताई। नतीजतन, कई अधिकारों में कटौती की गई और सीमित शक्तियों के साथ ही कमिश्नरी प्रणाली की अधिसूचना जारी हुई।

राज्य गठन के बाद यह पहला मौका माना जा रहा है, जब दोनों सेवाओं के बीच मतभेद इस स्तर तक सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। इस खींचतान के चलते सरकार को करीब 21 दिनों तक असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। वहीं पुलिस महकमे के भीतर भी इसे लेकर असंतोष की स्थिति बनी हुई है, जिसका असर आने वाले समय में प्रशासनिक समन्वय पर पड़ सकता है।

ओडिशा मॉडल नजरअंदाज, रिटायर्ड अफसरों में नाराजगी

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारियों का कहना है कि सीमित अधिकारों के साथ कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने का कोई ठोस औचित्य नहीं है। उनका तर्क है कि कार्यवाहक डीजीपी की अध्यक्षता वाली समिति ने ओडिशा मॉडल अपनाने की सिफारिश की थी, जिसमें पुलिस कमिश्नर को व्यापक अधिकार दिए गए हैं। इसके बावजूद उस मॉडल को नजरअंदाज कर मध्य प्रदेश मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया गया।

रिटायर्ड अधिकारियों का मानना है कि यदि राजधानी में प्रभावी पुलिसिंग करनी है तो पुलिस आयुक्त को पर्याप्त अधिकार दिए जाने चाहिए। अन्यथा नई व्यवस्था केवल नाम मात्र की बनकर रह जाएगी। इसी वजह से पुलिस महकमे और रिटायर्ड अफसरों के बीच इस निर्णय को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।

फिलहाल, राजधानी में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर कौन होगा और क्या वह सीमित अधिकारों के बावजूद इस नई व्यवस्था को प्रभावी बना पाएगा। आने वाले कुछ दिनों में इस पर से पर्दा उठने की पूरी संभावना है।