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Farmer Condition : 415 किमी का फांसला तय करके जब किसान पहुंचा मंडी, 205 किलो प्यार के थमा दिए 8.36 रूपए, जानें पूरा मामला

बेंगलुरु, नवप्रदेश। किसान अपने खेत में कई महीने की मेहनत के साथ फसल उगाता है और उम्मीद करता है कि जब वह अपनी फसल को मार्केट में बेचेगा तो उसे अच्छा दाम मिलेगा, लेकिन जब उसे उम्मीद से कम पैसे मिलते हैं तो वह टूट जाता (Farmer Condition) है। किसानी से उसका भरोसा टूटने लगता है।

कुछ ऐसा ही एक किसान के साथ हुआ जब वह मंडी में प्याज को बेचने के लिए गया। गडग के एक किसान को बेंगलुरु के यशवंतपुर बाजार में 205 किलो प्याज बेचने के लिए 8.36 रुपये मिले, जिसकी रसीद अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही (Farmer Condition) है।

https://twitter.com/arjundsage1/status/1597174503313797120

परेशान किसान ने इस रसीद को सोशल मीडिया पर शेयर किया और लोगों को दिखलाया कि आखिर उसकी मेहनत का उसे क्या नतीजा मिला। उसने अपने साथी किसानों को चेताया कि वह अपना माल बेंगलुरु ट्रांसफर करने से पहले कई बार सोचें।

थोक व्यापारी द्वारा दिया गया बिल बताता है कि 22 नवंबर 2022 को कटी पर्ची के मुताबिक मंडी में प्याज के दाम 200 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने कुली शुल्क से 24 रुपये और माल ढुलाई के 377.64 रुपये घटाकर 8.36 रुपये तिम्मापुर गांव में रहने वाले किसान पावाडेप्पा हल्लीकेरी को थमा (Farmer Condition) दिए।

गडग के करीब 50 किसानों ने यशवंतपुर बाजार में अपना प्याज बेचने के लिए 415 किलोमीटर की यात्रा की। वे इस बात से निराश थे कि कुछ दिनों पहले कीमत करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल थी जो गिरकर 200 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।

किसानों की उपज के लिए एक निश्चित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए किसान समूह राज्य सरकार से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पावडेप्पा ने बताया, ‘पुणे और तमिलनाडु के किसान को अच्छी कीमत मिल रही है क्योंकि उनकी फसल बेहतर है। लेकिन फिर भी हममें से किसी ने भी कीमत के इतने कम होने की उम्मीद नहीं की थी।’

किसान ने आगे बताया कि मुझे सिर्फ 8 रुपये मिले और मैंने फसल उगाने और मार्केट तक पहुंचाने के लिए 25,000 रुपये से अधिक खर्च किए। मेरे जैसे कई किसान अब निराश हैं।

कर्नाटक राज्य रायता संघ गदग जिले के प्रमुख यल्लप्पा बाबरी ने कहा, ‘हमने राज्य सरकार से जल्द से जल्द न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने का अनुरोध किया है क्योंकि लगातार बारिश के कारण इस पूरे साल किसानों को नुकसान हुआ है। यदि कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो हम दिसंबर के पहले सप्ताह में विरोध प्रदर्शन करेंगे।’

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