छत्तीसगढ़

Faculty Development Program Bilaspur : शासकीय माता शबरी नवीन कन्या महाविद्यालय में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन, लैंगिक समानता पर हुई विस्तृत चर्चा

Shaskiya Mata Shabari Naveen Kanya Mahavidyalaya में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन जैसे विषयों पर अपने विचार (Faculty Development Program Bilaspur) साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. सिन्हा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर डॉ. आरती सिंह, डॉ. शोभा महेश्वर, डॉ. बेला महंत और डॉ. ईशा बेला लकड़ा ने अतिथि वक्ताओं का परिचय कराया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपिका महोबिया और डॉ. सुरेश पटेल ने किया।

इतिहास में नारी की महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम के तृतीय दिवस पर डीपी विप्र महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजू शुक्ला ने अपने व्याख्यान में कहा कि वैदिक और पौराणिक काल में भारत में नारी को शक्ति स्वरूप मानकर पूजा जाता था। उन्होंने लोपामुद्रा और तिलोत्तमा जैसी विदुषी महिलाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि समय के साथ औद्योगिकीकरण के दौर में महिलाओं की स्थिति कमजोर हुई और उन्हें कम मजदूरी पर काम करना पड़ा। उन्होंने कहा कि आज भी कई क्षेत्रों में महिलाएं लैंगिक असमानता का सामना कर रही हैं, जिसे दूर करने के लिए समाज में सकारात्मक बदलाव आवश्यक है।

मीडिया की भूमिका पर जोर

श्रीनगर से आईं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमिता ने कहा कि समाज में लैंगिक समानता स्थापित करने में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण (Faculty Development Program Bilaspur) है। उन्होंने फिल्मों और विज्ञापनों के उदाहरण देते हुए बताया कि पहले फिल्मों में महिलाओं और थर्ड जेंडर को अक्सर नकारात्मक रूप में दिखाया जाता था, लेकिन अब कई फिल्मों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि पिंक, पीकू, टॉयलेट और मर्दानी जैसी फिल्मों ने समाज के बदलते दृष्टिकोण को सामने रखा है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि बिलासपुर के SIMS Hospital में ट्रांसजेंडर के लिए अलग सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था की गई है, जो समावेशी सोच का उदाहरण है।

बैंकिंग क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

द्वितीय सत्र में सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक डॉ. निर्मल घोष ने बैंकिंग क्षेत्र में लैंगिक समानता पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि बैंकिंग सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और कई बैंकों में 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी महिलाएं हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उच्च प्रशासनिक और कार्यकारी पदों पर महिलाओं की संख्या अभी भी कम है। उनके अनुसार वैश्विक स्तर पर लगभग 745 मिलियन महिलाएं अभी भी वित्तीय सेवाओं से वंचित हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताए कानूनी अधिकार

कार्यक्रम के पंचम दिवस पर Selina Kurre ने महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक संवेदनशीलता पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अवसर देना तभी सार्थक है जब वे अवसर सुलभ और व्यावहारिक हों।

उन्होंने यह भी कहा कि गृहिणियों को केवल “हाउसवाइफ” नहीं बल्कि “हाउस मैनेजर” के रूप में पहचान दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए Abhivyakti App के उपयोग (Faculty Development Program Bilaspur) की जानकारी भी दी।

इसके बाद डिप्टी एसपी कौशल्या साहू ने कहा कि संविधान में समानता का अधिकार होने के बावजूद व्यवहारिक जीवन में कई चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि हिंसा केवल शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक और मानसिक रूप में भी होती है, जिसे पहचानना और रोकना जरूरी है।

आभार और सार प्रस्तुति

कार्यक्रम के अंत में डॉ. दीपक शुक्ला और डॉ. ललिता साहू ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। वहीं डॉ. अनुपा तिर्की, डॉ. बेला महंत और डॉ. वंदना राठौर ने सभी वक्ताओं के व्याख्यान का सार प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला। इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से शिक्षकों और प्रतिभागियों को लैंगिक समानता, सामाजिक समावेशन और महिला अधिकारों के विषय में व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ।

Related Articles

Back to top button