संपादकीय: बांग्लादेश में कट्टरपंथियों का सफाया
Extremists wiped out in Bangladesh
Editorial: बांग्लादेश में हुए चुनाव में कट्टरपंथियों का सफाया हो गया। बांग्लादेश नेश्नलिस्ट पार्टी को दो तिहाई से ज्यादा बहुमत जबकि जमात-ए-इस्लामी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया था इसलिए वहां बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला हुआ। अब बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जिआऊर रहमान और वहां की तीन बार प्रधानमंत्री रह चुकी खालिादा जिया के बेटे तारीक रहमान नए प्रधानमंत्री बनेंगे जो 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे थे और इस बीच उनकी मां खालिदा जिया का निधन हो जाने के कारण उन्होंने पार्टी की बागडोर संभाली थी।
सिर्फ दो माह में ही उन्होंने बांग्लादेश में अपनी पार्टी को मजबूती दी और उनके नेतृत्व में बीएनपी ने एतिहासिक बहुमत हासिल कर नया इतिहास रच दिया। बांग्लादेश की सियासत ने जो नई करवट ली है उससे भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों को नया आयाम मिलने की उम्मीद बंधी है। यही वजह है कि बांग्लादेश में चुनावी रूझान आते ही भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी थी और यह उम्मीद जताई थी कि भारत और बांग्लादेश के बीच एक नया अध्याय लिखा जाएगा।
गौरतलब है कि जब से बांग्लादेश में शेख हसीना की निर्वाचित सरकार का तख्तापलट हुआ था और मोहम्मद युनूस ने वहां के कार्यवाहक के रूप में सत्ता की बागडोर संभाली थी तभी से बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों ने हिन्दु अल्पसंख्यों पर जुल्म ढाना शुरू कर दिया था। अब भारत को यह उम्मीद बंधी है कि तारिक रहमान की सरकार बनने के बाद हिन्दु अल्पसंख्यों के खिलाफ हिंसा और अत्याचार रूकेगा। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं के वोट पहले शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी को मिला करते थे इस बार आवामी लीग चुनाव से बाहर थी इसलएि हिन्दुओं के वोट तारिक रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेश्नलिस्ट पार्टी को मिले।
यही नहीं बल्कि बीएनपी ने छह हिन्दुओं को भी टिकट दी थी जिनमें से चार चुनाव जितने मे ंसफल भी हुए हैं। इसलिए अब बांग्लादेश में हिन्दुओं के हित सुरक्षित रहेंगे यह उम्मीद की जा सकती है। बहरहाल अब देखना यह होगा कि भारत विरोधी रवैया अख्तियार करने वाले मोहम्मद युनूस की बांग्लादेश में क्या भूमिका होती है। ऐसी चर्चा है कि अमेीिका मोहम्मद युनूस को बांग्लादेश का राष्ट्रपति बनाना चाहता है ताकि बांग्लादेश में अमेरिकी दखल बना रहे और चीन वहां दखलअंदाजी न कर पाये।
पाकिस्तान ने भी बांग्लादेश में आतंकियों की घुसपैठ करा रखी है इसलिए पाकिस्तान भी यही चाहेगा कि मोहम्मद युनूस वहां के राष्ट्रपति बने। यदि ऐसा हुआ तो भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में जमीं बर्फ पिघलने की संभावना कम हो जाएगी।
