Export Preparedness Index : EPI-2024 ने बदली तस्वीर, मध्यप्रदेश ‘चैलेंजर’ से टॉप पर
Export Preparedness Index
कभी-कभी किसी राज्य की मेहनत सुर्खियों से पहले आंकड़ों में दिखती है। बिना शोर के की गई तैयारी जब सामने आती है, तो वह सिर्फ रैंक नहीं बदलती, बल्कि धारणा भी बदल (Export Preparedness Index) देती है। हाल ही में जारी एक राष्ट्रीय आकलन में कुछ ऐसा ही संकेत मिला है, जिसने मध्यप्रदेश को नए नजरिए से देखने की वजह दे दी है।
नीति आयोग द्वारा जारी निर्यात तत्परता सूचकांक (Export Preparedness Index – EPI) 2024 में मध्यप्रदेश ने बड़ी छलांग लगाते हुए देश के 17 बड़े राज्यों में नौवां स्थान हासिल किया है। 57 अंकों के साथ प्रदेश न केवल ‘चैलेंजर’ श्रेणी में शामिल हुआ, बल्कि इस श्रेणी में शीर्ष पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि राज्य की निर्यात-संवर्धन नीतियों, व्यापार सुगमता में सुधार और मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का परिणाम मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि को प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक सोच का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निर्यात को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार मानते हुए लगातार (Export Preparedness Index) सुधार कर रही है। नीति निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक, हर स्तर पर व्यापार-अनुकूल वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया है, ताकि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश ‘लीडर’ श्रेणी तक पहुंच सके।
नीति आयोग की रिपोर्ट में राज्यों का मूल्यांकन निर्यात अवसंरचना, व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र, नीति एवं शासन और निर्यात प्रदर्शन जैसे चार प्रमुख स्तंभों के अंतर्गत 70 संकेतकों के आधार पर किया गया। इन सभी क्षेत्रों में मध्यप्रदेश ने संतुलित प्रगति दर्ज की है, जिसने उसकी निर्यात क्षमता को मजबूती दी है।
निर्यात आंकड़े भी इस प्रगति की पुष्टि करते हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जहां प्रदेश का कुल निर्यात 47,959 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 66,218 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह वृद्धि उद्योग-अनुकूल नीतियों, बेहतर लॉजिस्टिक्स और निर्यातकों को दिए गए सहयोग का प्रत्यक्ष संकेत है।
राज्य सरकार ‘एक जिला-एक उत्पाद’ को निर्यात से जोड़ने की रणनीति पर भी तेज़ी से काम कर रही है। इसके जरिए किसानों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का प्रयास (Export Preparedness Index) किया जा रहा है। कार्यशालाओं और एक्सेलरेटर कार्यक्रमों के माध्यम से नए उत्पादों और निर्यातकों को तकनीकी, विपणन और नीतिगत मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके साथ ही अन्य राज्यों के माध्यम से होने वाले अप्रत्यक्ष निर्यात को प्रत्यक्ष अवसर में बदलने की दिशा में भी पहल की जा रही है। संबंधित इकाइयों को स्वतंत्र निर्यातक के रूप में विकसित करने के लिए हैंडहोल्डिंग और समर्थन दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश के कुल निर्यात में और वृद्धि की संभावना बन रही है।
निर्यातकों और उद्यमियों के लिए शुरू की गई निर्यात हेल्पलाइन भी मार्गदर्शन का भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरी है। तकनीकी सहायता, बाजार जानकारी और नीतिगत सहयोग के जरिए यह व्यवस्था निर्यात प्रक्रिया को सरल बना रही है।
लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को मजबूत करने, MSME निर्यात एकीकरण और जिला स्तर पर निर्यात संवर्धन जैसे कदमों के साथ मध्यप्रदेश अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक निर्यात मानचित्र पर भी अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
