Environmental Clearance Supreme Court : अदालत में उठा ऐसा सवाल कि याचिका टिक न सकी, पर्यावरण मंजूरी पर बड़ा संकेत मिला
Environmental Clearance Supreme Court
नई दिल्ली में गुरुवार को Supreme Court of India ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें परियोजनाओं को पिछली तारीख (Environmental Clearance Supreme Court) से दी गई पर्यावरण मंजूरी को चुनौती दी गई थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका की वैधानिकता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
पीठ ने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि कोई याचिकाकर्ता रिट याचिका के जरिए अपने ही पूर्व के फैसले की समीक्षा कैसे कर सकता है। प्रधान न्यायाधीश ने जयराम रमेश के वकील से कहा कि अदालत को यह बताया जाए कि यह याचिका सुनवाई योग्य कैसे है। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई कि इस तरह की याचिकाओं के पीछे की मंशा अदालत भली-भांति समझती है।
अदालत ने यह भी कहा कि एक बार ऐसा फैसला (Environmental Clearance Supreme Court) आ चुका है, जिसे समीक्षा के दौरान बड़ी पीठ ने रद कर दिया था। अब अप्रत्यक्ष रूप से उसी मुद्दे पर पुनर्विचार कराने की कोशिश की जा रही है। पीठ ने सख्त लहजे में यह तक कहा कि याचिकाकर्ता को भारी जुर्माने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
पीठ की सख्ती को देखते हुए जयराम रमेश के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की इजाजत देते हुए कानून के अनुसार अन्य उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही पूर्व आदेश को पलटते हुए यह स्पष्ट (Environmental Clearance Supreme Court) किया था कि केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरण पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को भारी जुर्माने के भुगतान पर पिछली तारीख से पर्यावरण मंजूरी दे सकते हैं। शीर्ष अदालत का तर्क था कि ऐसा न करने पर हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं बेकार हो सकती हैं, जिससे राष्ट्रीय संसाधनों की भारी क्षति होगी।
