Employment Guarantee : रोजगार गारंटी व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अब गांवों में पहले से ज्यादा दिनों तक मिलेगा काम

गांवों में इन दिनों नई रोजगार व्यवस्था को लेकर काफी चर्चा (Employment Guarantee) चल रही है। पंचायत दफ्तरों के बाहर लोगों की आवाजाही बढ़ गई है और मजदूर परिवारों के बीच यह बात तेजी से फैल रही है कि अब काम के दिनों में बढ़ोतरी होने वाली है। कई जगहों पर लोग पुराने जॉब कार्ड और नए नियमों को लेकर जानकारी लेते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में इस बदलाव को लेकर हलचल साफ महसूस की जा रही है।

प्रदेश के कई हिस्सों में मजदूर और किसान परिवार इस नई योजना को राहत के तौर पर देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर साल में ज्यादा दिनों तक काम मिलेगा तो गांव से बाहर पलायन कम होगा और घर का खर्च संभालना आसान हो जाएगा। पंचायत स्तर पर भी नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए जा रहे हैं।

पहली जुलाई से लागू होगी नई व्यवस्था : Employment Guarantee

केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास और आजीविका को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विकसित भारत जी राम जी अधिनियम 2025 को अधिसूचित किया है। यह नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होगी। इसके लागू होने के बाद वर्तमान मनरेगा की जगह नई रोजगार गारंटी प्रणाली काम करेगी। छत्तीसगढ़ में भी इसे लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला बड़ा कदम साबित होगा। उनका कहना है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने में यह योजना अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश में इसे पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा ताकि अंतिम व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंचे।

अब 100 नहीं 125 दिन मिलेगा काम

नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को अब एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक अकुशल मजदूरी का कानूनी अधिकार मिलेगा। अभी तक यह सीमा 100 दिनों की थी। यानी अब मजदूर परिवारों को पहले के मुकाबले 25 दिन अतिरिक्त काम मिलेगा।

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026 और 2027 के लिए इस योजना में रिकॉर्ड बजट का प्रावधान किया है। राज्यों के हिस्से को मिलाकर कुल खर्च 1.51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहने का अनुमान है। मजदूरी सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। भुगतान साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर करना तय किया गया है।

देरी होने पर मिलेगा मुआवजा

अगर मजदूरी भुगतान में देरी होती है तो श्रमिकों को क्षतिपूर्ति (Employment Guarantee) भी दी जाएगी। वहीं काम मांगने के बाद तय समय में रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी रखा गया है।

पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से काम चुनने की ज्यादा छूट दी गई है। इससे गांवों में जल संरक्षण, खेत सुधार और ग्रामीण ढांचे से जुड़े स्थायी कामों को बढ़ावा मिलेगा।

पुराने कार्ड रहेंगे मान्य

सरकार ने बदलाव के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए संक्रमण व्यवस्था भी बनाई है। जिन लोगों के ई केवाईसी सत्यापित पुराने जॉब कार्ड हैं, वे तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते।

30 जून 2026 तक पुराने ढांचे के तहत चल रहे सभी काम जारी रहेंगे। इसके बाद 1 जुलाई से वे अपने आप नई व्यवस्था में शामिल हो जाएंगे। नए श्रमिक ग्राम पंचायत स्तर पर जाकर आसानी से पंजीयन करा सकेंगे।

गांवों के विकास पर रहेगा जोर

सरकार का कहना है कि यह सिर्फ रोजगार देने वाली योजना नहीं बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर (Employment Guarantee) बनाने का अभियान है। छत्तीसगढ़ में इसके लागू होने से जल संरक्षण, कृषि सुधार और ग्रामीण अधोसंरचना के कामों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। इससे गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।

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