Bastar Green Village : युवाओं ने पेश की मिसाल, ‘जहाज लाटा’ घास उखाड़कर खाली की जमीन; अब महकेंगे फलदार पौधे

सस्टेनेबल विलेज (सतत विकास वाले गांव) और सामुदायिक भागीदारी का एक बेहद खूबसूरत और अनोखा उदाहरण बस्तर जिले से सामने आया है। यहां के ग्राम सभा नेतानार के अंतर्गत आने वाले बिजलीपारा में ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। बिजलीपारा में स्थित निस्तार क्षेत्र और मरघट स्थल की भूमि को बचाने के लिए सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति तथा स्थानीय युवाओं ने मिलकर एक विशेष श्रमदान अभियान चलाया। इस अभियान के तहत पूरे इलाके में तेजी से फैलकर जमीन को बंजर बना रही आक्रामक खरपतवार क्रोमोलेना (जिसे स्थानीय लोग जहाज लाटा घास भी कहते हैं) को जड़ से उखाड़कर पूरी तरह साफ कर दिया गया।

हरित आवरण बढ़ने के साथ होगा जैव विविधता का संरक्षण

इस सराहनीय और पर्यावरण हितैषी अभियान में बिजलीपारा के युवाओं और ग्राम सभा के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाई। ग्राम सभा के सक्रिय सदस्य सोनू नाग ने आने वाली योजनाओं को साझा करते हुए बताया कि जहाज लाटा घास हटाए जाने के बाद जो जमीन खाली हुई है, उसका उपयोग बेहद योजनाबद्ध तरीके से किया जाएगा। इस पूरी साफ की गई भूमि पर जल्द ही बांस, कटहल, जपरा (लाल सिंदूर) और स्थानीय जलवायु के अनुकूल कई अन्य उपयोगी व फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस अनूठी पहल से न केवल क्षेत्र का हरित आवरण (ग्रीन कवर) तेजी से बढ़ेगा और प्रकृति की जैव विविधता सुरक्षित होगी, बल्कि आने वाले समय में ग्रामवासियों को विभिन्न महत्वपूर्ण वन उपजों का सीधा और बड़ा आर्थिक लाभ भी मिल सकेगा।

एक दिन की गतिविधि नहीं, यह तो ग्राम सभा का अटूट संकल्प है

जंगलों और अपनी निस्तारी जमीन को बचाने के इस सामूहिक प्रयास को सफल बनाने के लिए गांव के युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी ग्रामीण एक साथ औजार लेकर मैदान में उतरे और अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। ग्रामीणों का कहना है कि यह अभियान सिर्फ एक दिन की औपचारिकता या गतिविधि तक सीमित नहीं है। ग्राम सभा नेतानार ने सर्वसम्मति से यह बकायदा प्रस्ताव पारित कर संकल्प लिया है कि सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वनों की रक्षा, पर्यावरण संवर्धन तथा निस्तार क्षेत्रों के सुनियोजित विकास के लिए इस तरह के सामूहिक प्रयास भविष्य में भी निरंतर जारी रखे जाएंगे। नेतानार के जागरूक युवाओं का यह निस्वार्थ प्रयास आज के समय में छत्तीसगढ़ के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बन गया है।

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