संपादकीय

संपादकीय: बंगाल में चुनाव बड़ी चुनौती


Editorial: वैसे तो पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं लेकिन चर्चा में सिर्फ बंगाल विधानसभा बना हुआ है। इसकी वजह यही है कि बंगाल में हर बार हर चुनाव के दौरान हिंसा होने का रिकॉर्ड दर्ज है। हालांकि इस बार चुनाव निष्पक्ष और निर्भिक हो इसके लिए चुनाव आयोग ने वहां सुरक्षा के चाक चौबंध इंतेजाम किये हैं। इसके बावजूद वहां अभी से टीएमसी की सह पर उसके पाले हुए गुंडे मतदाताओं को डराने धमकाने लगे हैं। नतीजतन मतदाताओं में खौफ का माहौल बनने लगा है। मालदा की घटना ने चुनाव आयोग की चिंता और बढ़ा दी है।

गौरतलब है कि मालदा में आक्रोशित लोगों ने टीएमसी की सह पर आधा दर्जन चुनाव अधिकारियों को बंधक बना लिया था। यही नहीं बल्कि उनकी गाड़ी पर पहले पथराव भी किया था। यह गनीमत है कि इस पथराव से सिर्फ शिशे टूटे थे कोई घायल नहीं हुआ था। एक मीडिया रिर्पोट के मुताबिक इन अधिकारियों को जिंदा लगाने की प्लानिंग थी किन्तु ऐन समय पर सुरक्षाबलों के पहुंच जाने से अराजक तत्व अपने हिंसक इरादों में कामयाब नहीं हो पाये और उन अधिकारियों को कई घंटों के बाद मुक्त कराया गया और अब उन अराजक तत्वों के खिलार्फ कार्यवाही की जा रही है।

इसके बावजूद अन्य स्थानों पर भी टीएमसी समर्थकों द्वारा मतदाताओं को डराने धमकाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इससे स्पष्ट है कि इस बार भी तमाम कड़े इंतेजामों के बावजूद बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव कराना चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस बात को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी महसूस किया है और उन्होंने बंगाल के कूच बिहार में आयोजित एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए लोगों से आव्हान किया है कि वे टीएमसी के गुंडों से न डरे और निर्भिक होकर अपने मताधिकार का उपयोग करे।

उन्होंने लोगों को आश्वस्थ किया है कि बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद टीएमसी के गुंडों का पूरा हिसाब किया जाएगा। कानून अपना काम करेगा। कोई भी गुंडा कितना भी बड़ा क्यों न हो उसे कानून के कटघरे में खड़े करके कड़ी सजा दी जाएगी। इधर ममता बनर्जी लगातार चुनाव आयोग पर हमलावर है और वे केन्द्रीय गूह मंत्री अमित शाह पर भी लगातार निशाना साध रही हैं और उनके खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी करके यह आरोप लगा रही हैं कि भाजपा के इशारे पर बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा कराने की साजिश की जा रही है।

इसे ही कहते हैं उल्टाचोर कोतवाल को डांटे। ममता बनर्जी ने पिछले तीन विधानसभा चुनाव कैसे जीते हैं यह सारा देश जानता है किन्तु इस बार चुनाव आयोग की कड़ाई के कारण ममता बनर्जी के लिए गुंडागर्दी के बल पर चुनाव जीत पाना और कोई खेला करना आसान नहीं है। नतीजतन वे अपनी संभावित हार से बौखला कर विवादास्पद बयानबाजी कर रही है। जिसकी वजह से बंगाल में इस चुनाव के दौरान भी बवाल होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। इसलिए यह आवश्यक है कि बंगाल में पूरे चुनाव के दौरान सुरक्षा के और कड़े इंतेजाम किये जायें। खासतौर पर मतदान के दिन तो कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करना निहायत जरूरी है ताकि लोग निर्भिक होकर अपने मताधिकार का उपयोग कर सके और अपने पसंद सरकार चुन सके।

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