Eknath Shinde Assembly Statement : महाराष्ट्र विधानसभा में बड़ा खुलासा, एकनाथ शिंदे बोले – 6 साल में 30 लाख लोगों को कुत्तों ने काटा, रेबीज से 30 मौतें

Eknath Shinde Assembly Statement

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महाराष्ट्र में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने (Eknath Shinde Assembly Statement) आए हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले छह वर्षों में राज्य में करीब 30 लाख लोगों को कुत्तों ने काटा है। यह आंकड़ा वर्ष 2020 से 2026 के बीच दर्ज मामलों पर आधारित है और इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सदन में दिए लिखित जवाब में यह भी बताया कि वर्ष 2021 से 2023 के बीच कुत्तों के काटने से रेबीज संक्रमण के कारण कम से कम 30 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने स्वीकार किया कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे इस तरह की घटनाओं में तेजी आई है।

राज्य के कई प्रमुख शहर और जिले इस समस्या से अधिक (Eknath Shinde Assembly Statement) प्रभावित हैं। मुंबई, अहिल्यानगर, वसई-विरार, सांगली, भिवंडी, रायगढ़ और जालना जैसे क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे स्थानीय प्रशासन के सामने नियंत्रण की चुनौती और बढ़ गई है। इन इलाकों में लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए सरकार ने संबंधित विभागों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पर्यटन स्थलों और सरकारी परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए जनवरी 2026 में शासनादेश जारी किया गया है। इसके अलावा स्थानीय निकायों को नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कुत्तों की संख्या और संक्रमण के खतरे को नियंत्रित किया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य के शहरी और ग्रामीण निकायों को नवंबर 2025 में दिशा-निर्देश जारी (Eknath Shinde Assembly Statement) किए गए हैं। इसके तहत एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 को लागू करने और आवारा कुत्तों की नसबंदी तथा टीकाकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

यह मुद्दा अब केवल पशु नियंत्रण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा का विषय बन गया है। सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बावजूद, बढ़ते मामलों ने प्रशासन और समाज दोनों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।