Education Department Chhattisgarh : बिना बताए गायब कर्मचारी, शिक्षा विभाग का अचानक बड़ा फैसला”
Education Department Chhattisgarh
कई महीनों से सिस्टम के भीतर एक अजीब सी खामोशी बनी हुई थी। फाइलों में नाम दर्ज थे, पद सुरक्षित थे, वेतन से जुड़ी औपचारिकताएं भी चल रही थीं, लेकिन जिम्मेदारियों का निर्वहन कहीं नजर (Education Department Chhattisgarh) नहीं आ रहा था। अब इसी खामोशी को तोड़ते हुए शिक्षा विभाग ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरे महकमे में हलचल बढ़ा दी है।
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर से सामने आया है, जहां स्कूल शिक्षा विभाग ने लंबे समय से बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित चल रहे 13 शिक्षकों सहित कुल 22 कर्मचारियों के खिलाफ कठोर रुख अपनाया है।
कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इन सभी को सेवा समाप्ति से पहले अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की कार्रवाई स्वतः अमल में लाई जाएगी।
विभागीय रिकॉर्ड खंगालने पर यह तथ्य सामने आया कि संबंधित शिक्षक और कर्मचारी न तो किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत कराए ((Education Department Chhattisgarh)) हुए हैं और न ही विभाग को अपनी अनुपस्थिति की कोई आधिकारिक जानकारी दी गई है।
लंबे समय से इस तरह ड्यूटी से गायब रहना शैक्षणिक व्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा था, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूलों की कार्यप्रणाली पर असर पड़ रहा था।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिना पूर्व अनुमति एवं सक्षम स्वीकृति के लंबे समय तक अनुपस्थित रहना कर्तव्यों के प्रति गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता को दर्शाता है। यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के प्रतिकूल माना जाता है, जिसके तहत संबंधित कर्मचारियों पर दीर्घशास्ति की कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग ने यह भी साफ किया है कि शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार यदि कोई शासकीय सेवक तीन वर्ष से अधिक समय तक निरंतर ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है, तो उसे स्वेच्छा से सेवा त्याग करने वाला माना ((Education Department Chhattisgarh)) जा सकता है। इसी आधार पर अब संबंधित मामलों में सेवा से हटाने अथवा पदच्युत किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा विभाग में अनुशासन सर्वोपरि है और विद्यार्थियों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अंतिम कारण बताओ नोटिस की प्राप्ति के सात दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, अन्यथा नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारियों की स्वयं की होगी।
