सपांदकीय: अपने मियां मिू बनते डोनाल्ड ट्रंप

Editorial: अमेरिका-इजराइल को इरान से जंग करते हुए 35 दिन हो गये किन्तु इस जंग का कोई ओर छोर नजर नहीं आ रहा है यह लड़ाई और कितने दिनों तक चलेगी इस बारे में भी दावे के साथ कोई कुछ नहीं कह पा रहा है किन्तु बड़बोले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा कर दिया है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ जंग जित गया है। अपने मुंह मियां मिू बनते हुए उन्होंने दावा किया है कि ईरान के सभी बड़े नेता मारे जा चुके हैं और ईरान की सेना भी हमारे में कब्जे में आ चुकी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के नाम जारी अपने संदेश में कहा है कि अमेरिका ने ईरान को घुटनों पर ला दिया है और अब उसके साथ कोई डील नहीं होगी और उसे परमाणु शक्ति नहीं बनने दिया जाएगा। यह दावा करने के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप यह भी कह रहे हैं कि अगर ईरान ने दो तीन हफ्तों के भीतर समझौता नहीं किया तो उसे इतना मारेंगे कि ईरान पाषाण युग में पहुंच जाएगा। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अमेरिका ईरान को जंग में हराने का दावा ही कर रहा है तो फिर वह उसके साथ अभी भी जंग क्यों लड़ रहा है।
ईधर डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद ईरान ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और उसने बहरीन पर अमेरिका के मिलेट्री बेस को निशाना बनाकर नेस्तनाबूत कर दिया। ईरान ने फिर से अमेरिका को धमकी दी है कि वह यदि ईरान पर हमले करने से बाज नहीं आएगा तो खाड़ी देशों में अमेरिका ने जितने सैन्य अड्डे बना रखे हैं उन्हें चून चून कर तबाह कर दिया है।
ईरान ने यह भी कहा है कि होर्मूज पर ईरान के कब्जे को अमेरिका और इजराइल ही क्या दुनिया की पूरी ताकत भी नहीं हटा सकती। गौरतलब है कि होर्मूज पर अभी भी विभिन्न देशों के चार सौ से अधिक जहाज फंसे हुए हैं जिसके चलते पूरी दुनिया में तेल और गैस का संकट गहराता ही जा रहा है और क्रूज आयल की कीमत प्रति बैरल 107 डॉलर पहुंच गई है जिसके बहुत जल्द 105 डॉलर पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
होर्मूज की ईरान द्वारा नाकेबंदी किये जाने से खाड़ी देशों को एक माह के दौरान 18 लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है। यही नहीं बल्कि वहां कार्यरत लगभग 40 लाख लोगों का रोजगार भी संकट में पड़ गया है। डोनाल्ड ट्रंप की हटधर्मिता का दुष्परिणाम पूरी दुनिया भुगत रही है और अब इंग्लैंड ने दुनिया के 130 देशों की एक बैठक बुलाई है जिसका नाम ही होर्मूज बैठक रखा गया है। इस बैठक में होर्मूज को खुलवाने के लिए रणनीति तय की जाएगी। देखना होगा कि इंग्लैंड की यह पहल कितनी सफल होती है।



