अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर एक बार फिर नई बहस शुरू (Digital Service Tax) हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ताजा चेतावनी के बाद कई देशों में चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर वे देश, जहां विदेशी तकनीकी कंपनियों से डिजिटल कर वसूला जाता है, अब आगे की रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।
अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि किसी देश ने उसकी तकनीकी कंपनियों पर डिजिटल कर लगाया तो उस देश से आने वाले सामान पर भारी आयात शुल्क लगाया जा सकता है। इस घोषणा के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि भारत पर इसका कितना असर पड़ेगा और क्या भारतीय व्यापार को लेकर किसी तरह की चिंता की जरूरत है।
डिजिटल कर लगाने वाले देशों को अमेरिका की चेतावनी Digital Service Tax
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि जो भी देश अमेरिकी तकनीकी कंपनियों से डिजिटल सर्विस टैक्स वसूलेगा, उसके अमेरिका भेजे जाने वाले सभी उत्पादों पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पहले से लागू व्यापार समझौते भी प्रभावी नहीं माने जाएंगे।
ट्रंप प्रशासन लंबे समय से इस तरह के कर का विरोध करता रहा है। उसका मानना है कि इससे अमेरिका की बड़ी तकनीकी कंपनियों को अनुचित तरीके से निशाना बनाया जाता है।
क्या होता है डिजिटल सर्विस टैक्स
डिजिटल सर्विस टैक्स वह व्यवस्था है जिसके तहत किसी देश में कारोबार करने वाली विदेशी डिजिटल कंपनियों की कमाई पर कर लगाया (Digital Service Tax) जाता है। यह कर मुख्य रूप से उन बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों पर लागू होता है जो बिना भौतिक मौजूदगी के भी ऑनलाइन सेवाओं के जरिए बड़ी आय अर्जित करती हैं। इसी वजह से कई देशों ने अपने यहां डिजिटल कारोबार से होने वाली आय पर अलग कर व्यवस्था लागू की थी।
भारत पर कितना पड़ेगा असर
भारत के लिए राहत की बात यह है कि सरकार पहले ही विदेशी तकनीकी कंपनियों पर लागू इक्वलाइजेशन लेवी को समाप्त कर चुकी है। पहले इसे सामान्य तौर पर गूगल टैक्स भी कहा जाता था। यह कर विदेशी डिजिटल कंपनियों की ऑनलाइन विज्ञापन सेवाओं और ई कॉमर्स कारोबार पर लगाया जाता था।
सरकार ने व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया। पहले दो प्रतिशत की इक्वलाइजेशन लेवी हटाई गई और बाद में डिजिटल विज्ञापन सेवाओं पर लगने वाली छह प्रतिशत लेवी भी समाप्त कर दी गई।
यूरोपीय देशों की बढ़ी चिंता
अमेरिका की नई चेतावनी से सबसे अधिक चिंता उन देशों में देखी जा रही है जहां अभी भी डिजिटल सर्विस टैक्स लागू है। यूरोपीय संघ के कई सदस्य देश इस व्यवस्था को जारी रखे हुए हैं, जिससे अमेरिका और यूरोप के बीच मतभेद लगातार बने हुए हैं। यूरोपीय संघ ने स्पष्ट किया है कि वह अपने अधिकारों और नियामकीय स्वतंत्रता की रक्षा करेगा और आवश्यकता पड़ने पर उचित जवाब भी देगा।
फ्रांस पहले भी बन चुका है निशाने पर
फ्रांस वर्ष 2019 से बड़ी तकनीकी कंपनियों की स्थानीय कमाई पर तीन प्रतिशत डिजिटल कर वसूल रहा है। इसी कारण अमेरिका पहले भी फ्रांस को जवाबी शुल्क लगाने की चेतावनी (Digital Service Tax) दे चुका है। अमेरिका का कहना है कि इस तरह के कर उसकी तकनीकी कंपनियों के लिए व्यापारिक बाधाएं पैदा करते हैं।
अब ट्रंप की नई चेतावनी के बाद वैश्विक व्यापार जगत की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले समय में विभिन्न देश इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और इसका अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर कितना प्रभाव पड़ता है।
