Dhirendra Shastri Korba Event : कोरबा में ‘दिव्य दरबार’ बना चर्चा का केंद्र, 583 लोगों की घर वापसी, आस्था के बीच गूंजे सख्त संदेश

छत्तीसगढ़ के कोरबा में आयोजित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दिव्य दरबार ने चौथे दिन ऐसा दृश्य (Dhirendra Shastri Korba Event) पेश किया, जिसे देखने वाले लोग लंबे समय तक भूल नहीं पाएंगे। लाखों की भीड़, गूंजते मंत्र और भावनाओं से भरे चेहरे-पूरे आयोजन में आस्था का अलग ही रंग देखने को मिला। बताया जा रहा है कि इस दिन करीब दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु दरबार में पहुंचे और अपनी-अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अर्जी लगाई।
मंत्रोच्चार के बीच बदला माहौल (Dhirendra Shastri Korba Event)
दरबार के दौरान जैसे ही मंत्रोच्चार शुरू हुआ, कई लोगों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोग अचानक झूमने लगे, तो कुछ जमीन पर गिरकर अजीब हरकतें करने लगे। आयोजकों के मुताबिक, यह सब ‘भूत-प्रेत बाधा’ से मुक्ति की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया। वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने इसे आस्था का प्रभाव माना, जबकि माहौल पूरी तरह भावनात्मक और ऊर्जावान हो गया।
583 लोगों की ‘घर वापसी’ ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम का सबसे चर्चित पहलू रहा 583 लोगों की ‘घर वापसी’। मंच से घोषणा की गई कि ये वे लोग (Dhirendra Shastri Korba Event) हैं, जिन्होंने पहले किसी अन्य धर्म को अपनाया था और अब वापस सनातन परंपरा में लौटे हैं। इस दौरान एक मुस्लिम परिवार के शामिल होने की भी बात सामने आई, जिसने इस आयोजन में सनातन धर्म को स्वीकार किया। इस घटना ने पूरे कार्यक्रम को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया।
धर्मांतरण पर दिया सख्त संदेश
अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्मांतरण के मुद्दे पर तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने की कोशिशों का विरोध जरूरी है और किसी भी हाल में लोगों को विभाजित नहीं होने दिया जाएगा। उनके इस बयान पर दरबार में मौजूद लोगों ने जोरदार समर्थन जताया और माहौल में उत्साह देखने को मिला।
जरूरतमंदों के लिए भी उठी आवाज
दरबार के दौरान सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक पहल भी देखने (Dhirendra Shastri Korba Event) को मिली। एक गरीब बुजुर्ग की मदद के लिए मंच से अपील की गई, जिस पर कई लोग आगे आए। शास्त्री ने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग की मदद करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है और इसी से समाज मजबूत बनता है।
आस्था और चर्चा का केंद्र बना आयोजन
कोरबा में हुआ यह आयोजन अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर लोग इसे आस्था और विश्वास का प्रतीक मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ‘घर वापसी’ और दिए गए बयानों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। फिलहाल, यह दिव्य दरबार धार्मिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से लोगों के बीच गहरी छाप छोड़ गया है।



