संपादकीय

संपादकीय: बस्तर में फोर्स की तैनाती निहायत जरूरी

Editorial: केन्द्र और राज्य सरकार ने निधारित डेडलाइन 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र से नक्सली आतंक का खात्मा कर दिया है जो की एक बड़ी उपलब्धि हैं। जाहिर है डबल इंजन की सरकार ने दशकों पुराने नासूर का निर्धारित समय सीमा के भीतर समुचित उपचार कर दिया है और सरकार की यह कामयाबी विपक्ष को पच नहीं पा रही है।

तभी तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पर बयान दिया था कि यदि सरकार का यह दावा सही है कि बस्तर से लाल आतंक खत्म हो गया है तो वहां से केन्द्रीय सुरक्षाबलों को हटा देना चाहिए और बस्तर प्रवास पर जाने वाले केन्द्रीय मंत्री अमित शाह तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित अन्य मंत्रियों को अब बस्तर हवाई जहाज या हेलीकॉपटर से नहीं बल्कि सड़क मार्ग से जाना चाहिए। यह तो वही बचकानी बात हुई की किसी गंभीर रोग से ग्रसित मरीज का आपरेशन होते ही मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाये।

इस बारे में दैनिक नवप्रदेश ने इसी स्थान पर अपनी संपादकीय टिप्पणी में दो दिन पहले ही यह लिखा था कि बस्तर के नक्सली हिंसामुक्त होने के बाद भी वहां तैनात फोर्स को और कुछ समय के लिए वहां तैनात रखना चाहिए क्योंकि बस्तर में अभी हालात को समान्य होने में समय लगेगा। बहरहाल यह संतोष की बात है की सरकार ने और कुछ महीनों तक बस्तर में तैनात सुरक्षाबलों को यथावत रखने का फैसला किया है। बाद में धीरे धीरे वहां से फोर्स को हटाया जाना उचित होगा।

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