बिलासपुर की सेंट्रल जेल में हुई एक कैदी की मौत का मामला अब नई दिशा में पहुंच (Supreme Court) गया है। सर्वोच्च अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। मामले को लेकर मृतक के परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद फिर से मजबूत हुई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने केवल मुआवजे के सवाल तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि हिरासत में हुई मौत की जांच और जिम्मेदारी तय करने पर भी गंभीर सवाल उठाए। इसी क्रम में प्रदेश के दो शीर्ष अधिकारियों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।
डीजीपी और गृह सचिव को किया तलब Supreme Court
बिलासपुर सेंट्रल जेल में 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की मौत से जुड़े मामले में सर्वोच्च अदालत ने छत्तीसगढ़ के डीजीपी और गृह सचिव को 4 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि हिरासत में मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने और आपराधिक जांच शुरू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
पत्नी और बेटियों ने दायर की विशेष अनुमति याचिका
मृतक की पत्नी लहरा बाई ताम्रकार और उनकी दो नाबालिग बेटियों ने विशेष अनुमति याचिका दायर कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा और दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
गिरफ्तारी के तीन दिन बाद हुई थी मौत
मामले के अनुसार 18 जनवरी 2024 को सीपत पुलिस ने श्रवण सूर्यवंशी को आबकारी अधिनियम के तहत छह लीटर कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे केंद्रीय जेल बिलासपुर भेजा गया। 21 जनवरी को उसकी तबीयत बिगड़ने पर सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अगले दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
न्यायिक जांच में सामने आई गंभीर चोट
मृत्यु के बाद न्यायिक जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि सिर में लगी गंभीर चोट से उत्पन्न जटिलताओं के कारण श्रवण सूर्यवंशी (Supreme Court) की मौत हुई। इसके बाद परिजनों ने संबंधित पुलिस और जेल अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी।
एक लाख रुपये के मुआवजे पर अदालत ने जताई आपत्ति
इस मामले में हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2024 में परिजनों को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। अब सर्वोच्च अदालत ने इस राशि को परिवार की क्षति और पीड़ा की तुलना में बेहद अपर्याप्त (Supreme Court) बताया है। अदालत ने राज्य सरकार के हलफनामे पर भी असंतोष जताते हुए कहा कि उसमें यह स्पष्ट नहीं है कि हिरासत में मौत के मामले में आपराधिक जांच और एफआईआर को लेकर अब तक क्या कार्रवाई (Supreme Court) की गई है। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी, जब राज्य सरकार अपना पक्ष अदालत के सामने रखेगी।
