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Chhattisgarh High Court Order : मेडिकल पीजी एडमिशन पर बड़ा बदलाव, हाई कोर्ट के आदेश के बाद शासन की नई अधिसूचना जारी

राज्य में मेडिकल स्नातकोत्तर प्रवेश प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चली आ रही स्थिति अब स्पष्ट (Chhattisgarh High Court Order) हो गई है। न्यायिक हस्तक्षेप के बाद शासन ने प्रवेश नियमों को लेकर आधिकारिक स्थिति सामने रख दी है, जिससे आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया का रास्ता साफ हुआ है।

Chhattisgarh High Court Order
Chhattisgarh High Court Order

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज्य शासन ने मेडिकल पीजी प्रवेश को लेकर राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी है। हाई कोर्ट ने राज्य में लागू डोमिसाइल आरक्षण को निरस्त करते हुए सेंट्रल पूल और संस्थागत आरक्षण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं, जिन्हें अब शासन ने औपचारिक रूप से लागू कर दिया है।

https://youtu.be/2Ygj1X8AVq0

हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु शामिल (Chhattisgarh High Court Order) थे, ने अपने अहम निर्णय में कहा कि मेडिकल पीजी की कुल सीटों में 50 प्रतिशत सीटें संस्थागत आरक्षण और 50 प्रतिशत सीटें ओपन मेरिट के लिए आरक्षित रहेंगी।

संस्थागत आरक्षण के अंतर्गत आने वाली 50 प्रतिशत सीटें उन अभ्यर्थियों के लिए होंगी, जिन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित एनएमसी से मान्यता प्राप्त शासकीय या निजी चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है, अथवा जो सेवारत अभ्यर्थी की श्रेणी में आते हैं। इन सीटों पर प्रवेश केवल पात्र अभ्यर्थियों के बीच मेरिट के आधार पर दिया जाएगा।

वहीं शेष 50 प्रतिशत सीटें गैर-संस्थागत यानी ओपन कैटेगरी की मानी जाएंगी। इन सीटों पर प्रवेश राज्य स्तरीय मेरिट सूची के आधार पर सभी पात्र अभ्यर्थियों के लिए खुला रहेगा। ओपन कैटेगरी की सीटों पर किसी भी प्रकार का संस्थागत आरक्षण लागू नहीं होगा।

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उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने इस प्रकरण में डॉ. समृद्धि दुबे द्वारा दायर याचिका पर 20 नवंबर 2025 को पारित आदेश के पैरा-21 में दिए गए निर्देशों को लेकर स्पष्टीकरण की मांग (Chhattisgarh High Court Order) करते हुए हाई कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया था। उसी के आधार पर न्यायालय ने स्थिति स्पष्ट की, जिसके बाद शासन ने अधिसूचना जारी की है।

इस फैसले के बाद मेडिकल पीजी में प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी अनिश्चितता दूर हो गई है और अब काउंसलिंग प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ाई जा सकेगी।

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