झारखण्ड

Deadly Elephant Rampage 2025 : हाथी ने एक ही परिवार के पांच सहित सात की जान ली

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक बेकाबू हाथी (Deadly Elephant Rampage 2025) ने फिर मौत का कहर बरपाया और एक ही परिवार के पांच लोगों समेत कुल सात लोगों की जान ले ली।

यह हाथी लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में घुसकर लोगों पर हमला कर रहा है और पिछले एक सप्ताह में अब तक 17 लोगों की हत्या कर चुका है। बीती रात नोवामुंडी प्रखंड के बाबाडिया गांव में हाथी ने खलिहान के पास बनी झोपड़ी पर हमला कर दिया।

https://youtu.be/F9poNQALsdo

इस हमले में 53 वर्षीय सनातन मेराल, उनकी 51 वर्षीय पत्नी जोलको कुई, छह वर्षीय पुत्र मंगडू मेराल और आठ वर्षीय पुत्री दमयंती मेराल की मौत हो गई। केवल 10 वर्षीय सुशीला और 14 वर्षीय जयपाल किसी तरह भागकर बच सके।

इसके बाद हाथी गांव में दूसरी जगह पहुंचा, जहां झोपड़ी में सो रहे 21 वर्षीय गुरुचरण को भी सूंड़ से पटककर मार डाला और तीन अन्य को घायल कर दिया। बाद में बड़ापासेया गांव में भी एक व्यक्ति को सूंड़ से पकड़कर दूर फेंकने से मौत हो गई।

इस बेकाबू हाथी की गतिविधियों ने पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीण डर के मारे रातभर जागकर रहने को मजबूर हैं। वन विभाग ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और सतर्क रहने की अपील की है। हालांकि हाथी को भगाने में वन विभाग अब तक सफल नहीं हो पाया है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी भी है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हाथी को रोकने के लिए बांकुड़ा से 20 लोगों की टीम, ओडिशा से विशेषज्ञ और गुजरात के वनतारा से प्रशिक्षित टीम झारखंड के लिए रवाना हो चुकी है। वन अधिकारियों का कहना है कि हाथी की आवाजाही को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है।

https://youtu.be/E6RHLDKT86I

हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही का असर रेल पटरियों पर भी पड़ा है। चक्रधरपुर रेल मंडल प्रशासन ने सात से नौ जनवरी तक 12 मेमू ट्रेनें रद करने की घोषणा की है। इससे पहले 18 से 22 दिसंबर और 25 से 28 दिसंबर के दौरान भी इसी कारण कई ट्रेनें रद की जा चुकी हैं। ग्रामीण और वन अधिकारी मिलकर हाथी को सुरक्षित पकड़ने और आगे किसी बड़े नुकसान को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

यह घटनाक्रम (Deadly Elephant Rampage 2025) वन्यजीव प्रबंधन और सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। हाथी की लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश की घटनाएं वन्य जीवन और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व को उजागर करती हैं।

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