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Cyclone Maantha : भारत के इन राज्यों में ‘मोंथा’ ने मचाई तबाही, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी वर्षा, जनजीवन प्रभावित

गंभीर चक्रवात ‘मोंथा’ (Cyclone Maantha) के कमजोर पड़ने के बावजूद ओडिशा, आंध्र प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में इसका असर जारी है। बुधवार को दक्षिण ओडिशा के कई इलाकों में मूसलधार बारिश और तेज हवाओं के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कई स्थानों पर भूस्खलन से सड़कों पर मलबा जम गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। चंपावती नदी का जलस्तर बढ़ने से कुछ गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। चक्रवात (Cyclone Maantha) के कारण बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में वर्षा से फसलों का नुकसान हुआ है। धान में खड़ी फसल बिछ गई है तो आलू व दूसरी सब्जियां खराब हो गई हैं।

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ओडिशा में भुवनेश्वर सहित खुर्दा, कटक, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं, जिसके साथ हल्की से मध्यम वर्षा हो रही है। मयूरभंज में 105 मिमी, बालासोर में 93.5 मिमी और खुर्दा में 90 मिमी वर्षा दर्ज की गई। कई जिलों में पेड़ उखड़ने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और मकानों को नुकसान की घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं। रेल यातायात पर भी असर पड़ा है। ओडिशा से आंध्र प्रदेश, बंगाल और झारखंड के बीच चलने वाली 61 ट्रेनों को रद करना पड़ा है।

भुवनेश्वर मौसम केंद्र की निदेशक डॉ. मनोरमा मोहंती ने बताया कि अगले 24 घंटे में गंजाम, मलकानगिरी, रायगड़ा, कालाहांडी, गजपति, कोरापुट, सुंदरगढ़, क्योंझर और बालासोर जिलों में भारी वर्षा की संभावना है। मुख्यमंत्री मोहन चरण मजही ने कहा कि चक्रवात (Cyclone Maantha) का बड़ा असर नहीं पड़ा है, लेकिन राहत दल सतर्क रहेंगे।

आइएमडी के मुताबिक, ‘मोंथा’ वर्तमान में आंध्र प्रदेश के काकीनाडा से लगभग 100 किलोमीटर पश्चिम में केंद्रित है और आने वाले घंटों में गहरे दबाव में परिवर्तित हो जाएगा। राज्य के तटीय जिलों पश्चिम गोदावरी, कोनसीमा और काकीनाडा में मंगलवार शाम लैंडफॉल के बाद 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, जिससे कई घरों और झोपड़ियों को नुकसान हुआ है। प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में जाने से रोक दिया है और राहत-बचाव दल तैनात किए गए हैं। झारखंड में भी रांची, गुमला, लोहरदगा और हजारीबाग जिलों में वर्षा जारी है।

मप्र में फसलों को भारी नुकसान

मध्य प्रदेश में बेमौसम वर्षा ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। आगर मालवा, ग्वालियर-चंबल व विंध्य महाकोशल अंचलों में खेत खलिहानों में रखी कटी फसल और खेतों में खड़ी फसल को खासा नुकसान पहुंचा है। खेत खलिहानों में रखी मक्का की फसल में अंकुरण शुरू हो गया है। दाने काले पड़ने लगे हैं। खंडवा क्षेत्र में 50 से 60 प्रतिशत नुकसान हुआ है। रतलाम जिले में मटर की फसल खराब हो रही है। बुरहानपुर जिले के गांवों में मक्का, सोयाबीन, कपास फसल भीगी है।

धार के बदनावर क्षेत्र में चार घंटे में 76 मिमी वर्षा हुई है। इससे खेतों में जलभराव की स्थिति बनी। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में तीन दिनों की वर्षा ने खेतों में खड़ी धान, बाजरा, मटर, तिल, ज्वार आदि की फसलों में करीब 50 से 60 प्रतिशत नुकसान कर दिया है। यहां सरसों की बुवाई हो चुकी है, खेतों में पानी भरने से फसल खराब हो गई है। ग्वालियर, दतिया, श्योपुर आदि जिलों में धान की फसल को अधिक नुकसान पहुंचा है। क्योंकि इस क्षेत्र में अभी तक 15 प्रतिशत फसल ही कट सकी है।

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उप्र में आलू की बोआई पिछड़ने की आशंका

बीते दो दिनों में हुई वर्षा से पूर्वी उत्तर प्रदेश में खेत में खड़ी व कटाई के बाद खलिहान में पड़ी धान की फसल को आंशिक रूप से नुकसान हुआ है। सोनभद्र सहित कई जिलों में 10 से 20 प्रतिशत तक फसल प्रभावित हुई है, जबकि आलू बेल्ट में बोआई पिछड़ने की आशंका है।

बिहार में आंधी से हो सकता है फसलों को नुकसान

बिहार में पटना, गया, नालंदा, सिवान, औरंगाबाद, भभुआ, बक्सर, सीतामढ़ी व पूर्वी चंपारण में वर्षा हुई। गया के डोभी में राज्य की सर्वाधिक 72 मिमी वर्षा दर्ज की गई। पूर्व बिहार, कोसी और सीमांचल के जिलों में भी कई जगहों पर बूंदाबांदी हुई। कृषि विज्ञानी डॉ. शिवनाथ दास ने बताया कि वर्षा से तापमान में गिरावट आने के कारण रबी फसलों के लिए यह सकारात्मक होगा। आंधी की स्थिति में फसलों को नुकसान होगा। धान की फसल का नुकसान हो सकता है।

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